सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव से पहले ‘फ्रीबीज’ और कैश ट्रांसफर पर सख़्त टिप्पणी की

सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न राज्यों द्वारा चुनावों से पहले ‘फ्रीबीज’ यानी मुफ्त योजनाओं की घोषणा करने की प्रवृत्ति की आलोचना की, कहा कि इससे देश के दीर्घकालिक विकास को नुकसान होगा और लोगों के काम करने के प्रति मनोबल पर भी प्रभाव पड़ेगा।

Feb 19, 2026 - 15:25
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सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव से पहले ‘फ्रीबीज’ और कैश ट्रांसफर पर सख़्त टिप्पणी की
क्या चुनाव से ठीक पहले कैश ट्रांसफर योजनाओं की घोषणा करना न्यायोचित है? सुप्रीम कोर्ट ने ‘फ्रीबीज’ संस्कृति पर कड़ी टिप्पणी की, कहा– इससे राष्ट्र निर्माण प्रभावित होगा

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को चुनावों से ठीक पहले विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा ‘फ्रीबीज’ यानि मुफ्त योजनाओं की घोषणा करने की प्रवृत्ति की मौखिक टिप्पणियों के माध्यम से कड़ी आलोचना की। न्यायालय ने पूछा कि यह सिलसिला कितना लंबे समय तक चलेगा और कहा कि इससे देश के दीर्घकालिक आर्थिक विकास को नुकसान होगा। कोर्ट ने कहा कि बिना यह पता लगाए कि कौन भुगतान करने में सक्षम है और कौन नहीं, सभी को राज्य लाभ देना केवल तुष्टिकरण जैसा है, जो देश के आर्थिक विकास के लिए अनुकूल नहीं है।

कोर्ट ने कहा कि वह कुछ राज्यों में हाल ही में हुए चुनावों से अवगत है, जहां चुनावों से ठीक पहले कल्याण योजनाओं की घोषणा अचानक की गई थी। यदि सीधे नकद हस्तांतरण योजनाओं की घोषणा की जाती है, तो क्या लोग फिर भी काम करेंगे? कोर्ट ने यह सवाल भी उठाया।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमलया बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ तमिलनाडु पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट रूल्स 2024 के नियम 23 को चुनौती दी गई थी। सुनवाई के दौरान CJI कांत ने राज्य द्वारा बिजली बिलों को वहन करने पर सवाल उठाए और पूछा कि क्या यह सार्वजनिक हित में है।

न्यायालय ने कहा कि यह समझ में आता है कि एक कल्याणकारी राज्य जरूरतमंद लोगों की सहायता करना चाहता है। लेकिन यह भी पूछा कि क्यों सभी को बिना भेदभाव के मुफ्त लाभ दिया जाता है? क्या इससे एक तरह की तुष्टिकरण नीति नहीं बन जाती?

CJI कांत ने यह भी कहा कि राजस्व अधिशेष वाले राज्यों को भी अपने संसाधनों का उपयोग सड़कों, अस्पतालों और विद्यालयों के विकास के लिए करना चाहिए, बजाय इसके कि वे चुनाव के समय मुफ्त भोजन, मुफ्त कपड़े आदि वितरित करें।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि सुबह से शाम तक मुफ्त भोजन, मुफ्त गैस, मुफ्त बिजली दी जाएगी और सीधे नकद हस्तांतरण किया जाएगा, तो लोग काम क्यों करेंगे? इससे लोगों के काम करने की क्षमता और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की इच्छा पर असर पड़ेगा।

न्यायालय ने अन्य याचिकाओं पर भी फ्रीबीज के मुद्दे पर विचार कर रहा है। वहीं तमिलनाडु पावर कंपनी की याचिका पर कोर्ट ने मामले की सुनवाई जारी रखने का निर्णय लिया और केंद्र को नोटिस जारी किया।

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