राष्ट्रपति बोलीं- छत्तीसगढ़ हमेशा घर जैसा लगता है: बस्तर पंडुम में द्रौपदी मुर्मू ने सराही आदिवासी संस्कृति
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बस्तर पंडुम समारोह में छत्तीसगढ़ की समृद्ध आदिवासी संस्कृति और परंपराओं की सराहना की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ उन्हें हमेशा घर जैसा महसूस कराता है और यहां की संस्कृति बेहद प्राचीन और मधुर है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बस्तर क्षेत्र में आयोजित प्रसिद्ध बस्तर पंडुम समारोह में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने बस्तर की आदिवासी संस्कृति, परंपराओं और लोक कलाओं की खुलकर सराहना की। राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ आकर उन्हें हमेशा घर जैसा अपनापन महसूस होता है, क्योंकि यहां की संस्कृति बेहद प्राचीन, समृद्ध और मधुर है।
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि बस्तर की सांस्कृतिक पहचान केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए गौरव का विषय है। यहां की पारंपरिक लोक कला, नृत्य, संगीत और हस्तशिल्प भारत की सांस्कृतिक विविधता को मजबूत बनाते हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज सदियों से प्रकृति के संरक्षण और संतुलित जीवनशैली का उदाहरण पेश करता रहा है।
कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति ने पारंपरिक आदिवासी नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आनंद लिया। उन्होंने स्थानीय कलाकारों, शिल्पकारों और सांस्कृतिक समूहों से मुलाकात कर उनके कार्यों की सराहना की। राष्ट्रपति ने कहा कि बस्तर के कलाकारों की कला और हस्तशिल्प देश ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना सकते हैं, इसलिए इन्हें प्रोत्साहन देना जरूरी है।
राष्ट्रपति ने युवाओं से भी अपील की कि वे अपनी पारंपरिक संस्कृति और विरासत को संजोकर रखें और इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने में योगदान दें। उन्होंने कहा कि भारत की असली ताकत उसकी सांस्कृतिक विविधता में छिपी हुई है, जिसमें बस्तर का महत्वपूर्ण योगदान है।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। राष्ट्रपति के दौरे से पूरे क्षेत्र में उत्साह और गर्व का माहौल देखने को मिला।
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