E20 पेट्रोल से बढ़ीं वाहन मालिकों की परेशानियां! टैंक में काली फंगस, माइलेज कम और सर्विसिंग खर्च बढ़ा

E20 एथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल के बढ़ते इस्तेमाल से पुराने वाहनों में फ्यूल टैंक में नमी, जंग और काली फंगस की समस्या सामने आ रही है। जानिए इसका माइलेज, इंजन और सर्विसिंग खर्च पर क्या असर पड़ता है और इससे बचाव के आसान उपाय।

Jun 23, 2026 - 10:43
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E20 पेट्रोल से बढ़ीं वाहन मालिकों की परेशानियां! टैंक में काली फंगस, माइलेज कम और सर्विसिंग खर्च बढ़ा
E20 पेट्रोल का असर: फ्यूल टैंक में काली फंगस और जंग की शिकायतें बढ़ीं, पुराने वाहनों पर सबसे ज्यादा असर

देश में एथेनॉल-मिश्रित E20 पेट्रोल के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन इसके साथ कुछ पुराने वाहनों में तकनीकी समस्याएं भी सामने आने लगी हैं। ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक E20 ईंधन के उपयोग से कुछ पुराने मॉडल की गाड़ियों के फ्यूल सिस्टम में नमी, जंग और काली परत या फंगस जैसी जमा होने की शिकायतें बढ़ी हैं। इससे न केवल इंजन की कार्यक्षमता प्रभावित होती है, बल्कि वाहन की सर्विसिंग पर होने वाला खर्च भी बढ़ सकता है।

क्यों आती है यह समस्या?

एथेनॉल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह वातावरण से नमी को आसानी से आकर्षित करता है। यदि वाहन लंबे समय तक खड़ा रहे या फ्यूल टैंक में पर्याप्त ईंधन न हो, तो टैंक के अंदर पानी जमा होने की संभावना बढ़ जाती है। यही नमी धीरे-धीरे फ्यूल टैंक, फ्यूल पंप और अन्य धातु वाले हिस्सों में जंग का कारण बन सकती है।

फ्यूल टैंक में क्यों जमती है काली परत?

विशेषज्ञों का कहना है कि नमी और ईंधन के मिश्रण से टैंक के भीतर गंदगी या काली परत बन सकती है। यह जमा पदार्थ फ्यूल फिल्टर और इंजेक्टर तक पहुंचकर उन्हें आंशिक रूप से ब्लॉक कर सकता है। इसके कारण इंजन की परफॉर्मेंस प्रभावित हो सकती है और वाहन स्टार्ट होने या चलने में दिक्कत आ सकती है।

माइलेज पर भी पड़ सकता है असर

E20 पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा अधिक होने के कारण इसकी ऊर्जा क्षमता सामान्य पेट्रोल की तुलना में कुछ कम होती है। इसी वजह से कुछ वाहनों में माइलेज में लगभग 2 से 7 प्रतिशत तक कमी देखने को मिल सकती है। हालांकि वास्तविक असर वाहन के मॉडल, इंजन तकनीक और ड्राइविंग परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

पुराने वाहनों में ज्यादा जोखिम

जो वाहन E20 ईंधन के अनुरूप डिजाइन नहीं किए गए थे, उनमें रबर पाइप, सील, गैस्केट और कुछ प्लास्टिक पार्ट्स समय के साथ जल्दी खराब हो सकते हैं। इससे ईंधन रिसाव, इंजन की कार्यक्षमता में गिरावट और अतिरिक्त मरम्मत की जरूरत पड़ सकती है।

वाहन मालिक क्या सावधानी बरतें?

विशेषज्ञ वाहन मालिकों को कुछ जरूरी सावधानियां अपनाने की सलाह देते हैं।

  • यदि वाहन कई दिनों तक उपयोग में नहीं आने वाला है, तो फ्यूल टैंक को लगभग पूरा भरकर रखें, ताकि टैंक में हवा और नमी के लिए कम जगह बचे।
  • समय-समय पर फ्यूल फिल्टर और फ्यूल सिस्टम की जांच करवाएं।
  • पुरानी गाड़ियों की नियमित सर्विसिंग और फ्यूल सिस्टम की सफाई कराते रहें।
  • निर्माता कंपनी द्वारा E20 ईंधन को लेकर जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें और यदि आवश्यक हो तो अधिकृत सर्विस सेंटर से वाहन की जांच कराएं।

क्या सभी वाहनों पर समान असर पड़ता है?

नहीं। नए मॉडल के कई वाहन E20 ईंधन को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं और उनमें इस तरह की समस्याओं की संभावना कम होती है। वहीं पुराने वाहनों में, खासकर जिनकी नियमित देखभाल नहीं होती, ऐसे मामलों का जोखिम अधिक हो सकता है।

E20 पेट्रोल का उद्देश्य आयातित ईंधन पर निर्भरता कम करना और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देना है। हालांकि, पुराने वाहनों के मालिकों के लिए नियमित रखरखाव और समय पर जांच बेहद जरूरी हो गई है। सही देखभाल और निर्माता के निर्देशों का पालन करके इन संभावित समस्याओं के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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