ताम्रध्वज साहू का भाजपा सरकार पर हमला, अवैध रेत उत्खनन और महंगाई को लेकर उठाए सवाल
पूर्व गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू ने भाजपा सरकार पर अवैध रेत उत्खनन, महंगाई, खाद संकट और बढ़ी बिजली दरों को लेकर निशाना साधा। उन्होंने निष्पक्ष जांच और जनता को राहत देने की मांग की।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू ने राज्य सरकार के सुशासन के दावों पर सवाल उठाते हुए कई मुद्दों पर भाजपा सरकार की कार्यशैली की आलोचना की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में महंगाई, अवैध खनन, खाद संकट और बढ़ती बिजली दरों जैसी समस्याओं से आम जनता परेशान है और सरकार को इन मुद्दों पर गंभीरता से काम करने की जरूरत है।
अवैध रेत उत्खनन पर लगाए गंभीर आरोप
ताम्रध्वज साहू ने प्रदेश में लगातार सामने आ रहे अवैध रेत उत्खनन के मामलों पर चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि इस अवैध कारोबार में भाजपा से जुड़े कुछ लोगों की भूमिका होने की बातें सामने आ रही हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि अवैध उत्खनन और परिवहन को रोकने के लिए स्पष्ट नियम बनाए जाएं और उनका सख्ती से पालन कराया जाए, ताकि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित हो सके।
महंगाई और बढ़ती लागत पर सरकार को घेरा
पूर्व गृह मंत्री ने कहा कि चुनाव के दौरान किए गए वादों के बावजूद आम लोगों को राहत नहीं मिली है। उनका कहना था कि बिजली दरों में बढ़ोतरी, रसोई गैस सिलेंडर की ऊंची कीमत, पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम और आवश्यक वस्तुओं की महंगाई ने लोगों का घरेलू बजट बिगाड़ दिया है।
उन्होंने कहा कि ईंधन की कीमतों में वृद्धि का असर परिवहन लागत पर पड़ता है, जिससे खाद्य सामग्री और दैनिक उपयोग की वस्तुएं भी महंगी हो जाती हैं। इसका सबसे अधिक असर गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर पड़ रहा है।
खाद-बीज की उपलब्धता पर जताई चिंता
साहू ने किसानों की समस्याओं का उल्लेख करते हुए कहा कि खरीफ सीजन के दौरान कई क्षेत्रों में किसानों को समय पर खाद और बीज उपलब्ध नहीं हो रहे हैं। उन्होंने सरकार से कृषि से जुड़े संसाधनों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की, ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
सुशासन के दावों पर उठाए सवाल
ताम्रध्वज साहू ने कहा कि यदि प्रदेश में महंगाई, बिजली दरों में वृद्धि, खाद-बीज की कमी और अवैध गतिविधियां लगातार बनी हुई हैं, तो इसे सुशासन नहीं कहा जा सकता। उनके अनुसार जनता को राहत देने वाले ठोस फैसले नजर नहीं आ रहे हैं।
उन्होंने यह भी दावा किया कि सरकार के कुछ जनप्रतिनिधि भी समय-समय पर अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर असंतोष जताते रहे हैं। ऐसे में सरकार को आत्ममंथन करते हुए प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार और जनता को राहत देने वाली नीतियों पर ध्यान देना चाहिए।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0









