भारत का मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम सफल, 5000 किमी दूर से आने वाली मिसाइलों को भी करेगा निष्क्रिय

DRDO ने मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम का सफल परीक्षण किया है। यह प्रणाली 5000 किमी से अधिक दूरी से आने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों और ICBM श्रेणी के खतरों को भी हवा में नष्ट करने में सक्षम है। भारत अब इस तकनीक वाले चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है।

Jun 13, 2026 - 13:56
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भारत का मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम सफल, 5000 किमी दूर से आने वाली मिसाइलों को भी करेगा निष्क्रिय
DRDO की बड़ी उपलब्धि: लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही मार गिराने वाला स्वदेशी सिस्टम सफलतापूर्वक परीक्षणित

भारत की रक्षा क्षमता को बड़ी मजबूती, मल्टी-लेयर्ड मिसाइल डिफेंस सिस्टम का सफल परीक्षण

नई दिल्ली। भारत ने अपनी सामरिक और रक्षा क्षमताओं को नई ऊंचाई देते हुए स्वदेशी मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) सिस्टम का सफल परीक्षण किया है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा 10 और 11 जून को किए गए लगातार परीक्षणों में इस प्रणाली ने लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने और नष्ट करने की अपनी क्षमता का सफल प्रदर्शन किया।

इस उन्नत रक्षा प्रणाली को इस तरह विकसित किया गया है कि यह दुश्मन द्वारा दागी गई बैलिस्टिक मिसाइलों को लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही हवा में इंटरसेप्ट कर सके। परीक्षण के दौरान सिस्टम ने विभिन्न स्तरों पर खतरे की पहचान, ट्रैकिंग और इंटरसेप्शन की क्षमता प्रदर्शित की।

ICBM श्रेणी के खतरों से निपटने में सक्षम

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रणाली इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) श्रेणी के खतरों का भी सामना करने में सक्षम है। ICBM ऐसी मिसाइलें होती हैं जिनकी मारक क्षमता 5,500 किलोमीटर से अधिक होती है और इन्हें दुनिया के सबसे घातक रणनीतिक हथियारों में गिना जाता है।

कैसे काम करता है मल्टी-लेयर्ड BMD सिस्टम?

मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम कई स्तरों पर सुरक्षा प्रदान करता है। सबसे पहले अत्याधुनिक रडार दुश्मन की मिसाइल का पता लगाते हैं। इसके बाद कमांड और कंट्रोल सेंटर खतरे का विश्लेषण करता है और इंटरसेप्टर मिसाइलों को सक्रिय किया जाता है। ये इंटरसेप्टर हवा में ही दुश्मन की मिसाइल को निशाना बनाकर उसे नष्ट कर देते हैं।

इस प्रणाली की खासियत इसकी बहु-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था है। यदि पहली इंटरसेप्टर मिसाइल लक्ष्य को नष्ट करने में सफल नहीं होती, तो दूसरी सुरक्षा परत सक्रिय होकर खतरे को निष्क्रिय करने का प्रयास करती है।

दुनिया के चुनिंदा देशों में शामिल हुआ भारत

इस उपलब्धि के साथ भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है जिनके पास ऑपरेशनल स्तर की बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस क्षमता मौजूद है। इससे पहले अमेरिका, रूस, चीन और इजराइल जैसी सैन्य शक्तियों के पास ही ऐसी उन्नत तकनीक उपलब्ध थी।

नौसेना की क्षमता को भी मिला बल

इसी अवधि में DRDO ने नेवल एंटी-शिप मिसाइल (मीडियम रेंज) का भी सफल परीक्षण किया। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि भारत की समुद्री सुरक्षा और स्ट्राइक क्षमता को और मजबूत करेगी।

परीक्षण से पहले सुरक्षा के विशेष इंतजाम

ओडिशा के बालासोर स्थित चांदीपुर इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज में हुए परीक्षण के दौरान सुरक्षा के मद्देनजर लॉन्च पैड के आसपास के 11 गांवों को अस्थायी रूप से खाली कराया गया था। हजारों ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया और परीक्षण सफल होने के बाद उन्हें वापस घर लौटने की अनुमति दे दी गई।

रक्षा मंत्रालय का मानना है कि यह सफलता भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीक और आत्मनिर्भर सैन्य क्षमता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो भविष्य में देश की रणनीतिक सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाएगा।

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