जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी: CJP ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर मांगा सीधा जवाब, प्रदर्शनकारियों पर अब तक 13 FIR दर्ज
दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन के बीच CJP ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सरकार से 'हां या ना' में जवाब मांगा है। वहीं, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अब तक 13 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी: CJP ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर मांगा 'हां या ना' में जवाब, प्रदर्शनकारियों पर अब तक 13 एफआईआर दर्ज
नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी विरोध प्रदर्शन के बीच आंदोलनकारी संगठन सिटीजंस फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) ने केंद्र सरकार से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर स्पष्ट जवाब मांगा है। संगठन का कहना है कि सरकार को इस मुद्दे पर 'हां या ना' में जवाब देना चाहिए और अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।
इधर, दिल्ली पुलिस ने बताया है कि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में अब तक 13 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। इन मामलों में सार्वजनिक व्यवस्था बाधित करने, निर्धारित नियमों के उल्लंघन और अन्य आरोपों की जांच की जा रही है।
CJP ने सरकार से मांगा स्पष्ट जवाब
CJP के प्रतिनिधियों ने कहा कि आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक सरकार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के सवाल पर अपना स्पष्ट रुख नहीं बताती। उनका कहना है कि इस मुद्दे पर लंबे समय से विरोध प्रदर्शन चल रहा है और अब सरकार को सीधे तौर पर जवाब देना चाहिए।
जंतर-मंतर पर जारी है विरोध प्रदर्शन
जंतर-मंतर पर पिछले कई दिनों से बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जुटे हुए हैं। आंदोलनकारी परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान कई बार पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति भी बनी।
प्रदर्शनकारियों पर 13 एफआईआर
दिल्ली पुलिस के अनुसार, अब तक प्रदर्शन से जुड़े विभिन्न मामलों में 13 एफआईआर दर्ज की गई हैं। पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है और सभी मामलों की जांच नियमानुसार जारी है।
हालांकि, प्रदर्शनकारी संगठनों का आरोप है कि शांतिपूर्ण आंदोलन को दबाने के लिए पुलिस कार्रवाई की जा रही है। दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि सार्वजनिक सुरक्षा और यातायात व्यवस्था बनाए रखना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।
संसद में भी गरमाया मुद्दा
यह मामला संसद के मानसून सत्र में भी लगातार उठाया जा रहा है। विपक्ष सरकार से जवाब मांग रहा है, जबकि केंद्र सरकार ने संबंधित मुद्दे पर लोकसभा में चर्चा के लिए सहमति जता दी है। ऐसे में आने वाले दिनों में संसद और सड़क, दोनों जगह यह मुद्दा चर्चा का केंद्र बना रह सकता है।
आगे क्या?
अब सभी की नजर सरकार के अगले कदम पर है। यदि सरकार इस मुद्दे पर औपचारिक बयान देती है, तो आंदोलन की दिशा बदल सकती है। वहीं, प्रदर्शनकारी संगठनों ने संकेत दिए हैं कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर स्पष्ट निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।
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