खाद-बीज संकट पर भूपेश बघेल का सरकार पर हमला, सहकारी समितियों का किया निरीक्षण; रमन सिंह ने दी प्राकृतिक खेती की सलाह
दुर्ग के पाटन क्षेत्र में खाद और डीएपी की कमी को लेकर भूपेश बघेल ने सहकारी समितियों का निरीक्षण कर सरकार पर निशाना साधा। वहीं विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह ने किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील की।
दुर्ग। खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ छत्तीसगढ़ में खाद और बीज की उपलब्धता का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। दुर्ग जिले के पाटन विधानसभा क्षेत्र में किसानों की शिकायतों के बीच पूर्व मुख्यमंत्री एवं विधायक भूपेश बघेल ने कई सहकारी समितियों का दौरा कर व्यवस्था का जायजा लिया और राज्य सरकार पर किसानों की जरूरतों की अनदेखी करने का आरोप लगाया।
निरीक्षण के दौरान उनके साथ जिला कांग्रेस ग्रामीण अध्यक्ष राकेश ठाकुर भी मौजूद रहे। उन्होंने पंडहोर, सोमनी, फेकारी, गाड़ाडीह, कुम्हली, जामगांव आर, बेलहारी, निपानी, रानीतराई और सेलूद सहित कई समितियों में किसानों से सीधे बातचीत कर खाद, बीज और ऋण वितरण की स्थिति की जानकारी ली।
किसानों ने बताई खाद और बीज की कमी
दौरे के दौरान कई किसानों ने शिकायत की कि खरीफ बुवाई के महत्वपूर्ण समय में उन्हें जरूरत के मुताबिक खाद और बीज उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। किसानों का कहना था कि वे ऋण पुस्तिका लेकर कई दिनों से समितियों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन पर्याप्त मात्रा में उर्वरक नहीं मिल रहा है।
उनका मानना है कि यदि समय पर खाद उपलब्ध नहीं हुई तो बुवाई और फसल उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
DAP की कमी को लेकर सरकार पर निशाना
निरीक्षण के बाद भूपेश बघेल ने दावा किया कि कई सहकारी समितियों में डीएपी खाद की भारी कमी है। उन्होंने कहा कि कुछ स्थानों पर सीमित मात्रा में उर्वरक पहुंचा है, जबकि कई समितियों में किसान अब भी इंतजार कर रहे हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पहले किसानों को ऋण वितरण में नकद और खाद-बीज का अनुपात अलग था, लेकिन वर्तमान व्यवस्था में बदलाव के कारण किसानों को समय पर आवश्यक संसाधन नहीं मिल पा रहे हैं।
वितरण व्यवस्था पर भी उठाए सवाल
भूपेश बघेल ने खाद वितरण की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसानों की भूमि के आकार के अनुसार उर्वरक उपलब्ध नहीं कराया जा रहा। उनके अनुसार छोटे और बड़े दोनों किसानों को समान मात्रा में खाद मिलने से अधिक रकबे वाले किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने डीएपी के स्थान पर एनपीके उर्वरक दिए जाने पर भी आपत्ति जताते हुए कहा कि इससे किसानों की खेती की लागत बढ़ रही है।
दलाली की शिकायतों का भी किया जिक्र
पंडहोर सहकारी समिति के निरीक्षण के दौरान कुछ किसानों ने कथित रूप से दलालों के माध्यम से काम होने की शिकायत भी की। इस पर भूपेश बघेल ने कहा कि यदि इन आरोपों में सच्चाई है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
केंद्र सरकार की नीतियों पर भी सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने खाद संकट को वैश्विक परिस्थितियों और केंद्र सरकार की नीतियों से जोड़ते हुए कहा कि पर्याप्त आपूर्ति नहीं होने का असर सीधे किसानों पर पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि इससे खेती की लागत और कृषि उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
रमन सिंह ने प्राकृतिक खेती पर दिया जोर
इस मुद्दे पर विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह ने अलग दृष्टिकोण रखते हुए किसानों से रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने की जरूरत है ताकि मिट्टी की उर्वरता बनी रहे और खेती अधिक टिकाऊ बन सके।
उन्होंने गोबर खाद और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग को बढ़ाने की सलाह देते हुए कहा कि इससे मिट्टी की गुणवत्ता के साथ-साथ लोगों के स्वास्थ्य को भी लाभ मिलेगा।
खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ खाद और बीज की उपलब्धता का मुद्दा अब राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। एक ओर विपक्ष सरकार पर किसानों की अनदेखी का आरोप लगा रहा है, वहीं दूसरी ओर सरकार और उसके प्रतिनिधि प्राकृतिक खेती को दीर्घकालिक समाधान के रूप में सामने रख रहे हैं। अब किसानों की नजर इस बात पर है कि उन्हें समय पर पर्याप्त खाद और बीज उपलब्ध हो पाते हैं या नहीं।
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