राम मंदिर दान विवाद: सिंधी समाज ने 200 किलो चांदी के उपयोग पर उठाए सवाल, SIT जांच पर टिकी निगा

राम मंदिर दान विवाद में नया दावा: सिंधी समाज ने कहा- 200 किलो चांदी दी, न रसीद मिली और न उपयोग की जानकारी

Jun 25, 2026 - 16:25
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राम मंदिर दान विवाद: सिंधी समाज ने 200 किलो चांदी के उपयोग पर उठाए सवाल, SIT जांच पर टिकी निगा
राम मंदिर दान विवाद में नया दावा: सिंधी समाज ने कहा- 200 किलो चांदी दी, न रसीद मिली और न उपयोग की जानकारी

अयोध्या स्थित राम मंदिर से जुड़े दान विवाद में अब सिंधी समाज की ओर से भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। समाज के प्रतिनिधियों का दावा है कि मंदिर निर्माण के लिए वर्षों पहले बड़ी मात्रा में चांदी दान की गई थी, लेकिन आज तक न तो दान की आधिकारिक रसीद मिली और न ही यह जानकारी दी गई कि उस चांदी का उपयोग किस उद्देश्य से किया गया।

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब मंदिर से जुड़े दान और वित्तीय लेनदेन को लेकर विभिन्न आरोपों की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) काम कर रहा है।

क्या है सिंधी समाज का दावा?

विश्व सिंधी सेवा संगम के पदाधिकारियों के अनुसार, जनवरी 2021 में अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए लगभग 200 किलोग्राम चांदी दान की गई थी। दावा किया गया कि यह चांदी एक-एक किलो की ईंटों के रूप में सौंपी गई थी और इसकी अनुमानित कीमत उस समय करीब 1.5 करोड़ रुपये थी।

समाज का कहना है कि इस दान के बाद उन्हें कोई आधिकारिक रसीद उपलब्ध नहीं कराई गई। साथ ही यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि मंदिर निर्माण में इस चांदी का उपयोग किस प्रकार किया गया।

विदेशों से भी जुटाया गया था सहयोग

सिंधी समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि इस अभियान में केवल भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में रहने वाले सिंधी समुदाय के लोगों ने भी आर्थिक सहयोग दिया था। कई श्रद्धालुओं ने राम मंदिर निर्माण को लेकर अपनी आस्था के चलते योगदान दिया था।

उनका कहना है कि अब दानदाताओं की ओर से लगातार यह सवाल पूछा जा रहा है कि उनके सहयोग का उपयोग आखिर कहां और कैसे किया गया।

पारदर्शिता की उठी मांग

समाज का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि दान प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। उनका मानना है कि जब कोई व्यक्ति धार्मिक कार्यों के लिए दान देता है तो उसे यह जानने का अधिकार होना चाहिए कि उसका योगदान किस उद्देश्य में इस्तेमाल हुआ।

प्रतिनिधियों ने कहा कि भविष्य में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे प्रत्येक दानदाता को उसके योगदान का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध कराया जा सके।

SIT जांच से जुड़ी उम्मीदें

दान से जुड़े विवादों की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) से सिंधी समाज ने निष्पक्ष जांच की उम्मीद जताई है। उनका कहना है कि जांच पूरी होने के बाद यदि किसी तरह की अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।

साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जांच पूरी होने तक किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

दान पर पड़ सकता है असर

समाज के प्रतिनिधियों का मानना है कि यदि दान प्रक्रिया को लेकर लोगों के मन में संदेह पैदा होता है तो भविष्य में धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं को मिलने वाले दान पर इसका असर पड़ सकता है। उनका कहना है कि पारदर्शी व्यवस्था से ही श्रद्धालुओं का विश्वास बना रह सकता है।

जांच पूरी होने का इंतजार

फिलहाल पूरे मामले में जांच जारी है और संबंधित पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। ऐसे में अंतिम स्थिति जांच एजेंसियों की रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।

राम मंदिर दान विवाद में सिंधी समाज के नए दावे ने बहस को और तेज कर दिया है। समाज ने 200 किलो चांदी के उपयोग और आधिकारिक दस्तावेजों को लेकर सवाल उठाए हैं, जबकि मामले की जांच SIT कर रही है। जांच पूरी होने तक इस प्रकरण में किसी भी दावे की अंतिम पुष्टि होना बाकी है, लेकिन यह मामला धार्मिक संस्थाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता पर एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है।

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