छत्तीसगढ़ के 95 हजार घरों की छत पर सोलर पैनल, बिजली बिल में हो रही बचत
प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना से छत्तीसगढ़ में 95 हजार से अधिक घर सौर ऊर्जा से जुड़े हैं। बिजली बिल में बचत के साथ परिवार अतिरिक्त बिजली ग्रिड को देकर ‘ऊर्जादाता’ भी बन रहे हैं।
छत्तीसगढ़ में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। प्रधानमंत्री सूर्यघर: मुफ्त बिजली योजना के तहत प्रदेश में अब तक 95 हजार से अधिक घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाए जा चुके हैं। इससे हजारों परिवारों को बिजली खर्च में राहत मिल रही है और वे अपनी जरूरत के लिए बिजली पैदा करने के साथ अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में भेजकर ‘ऊर्जादाता’ बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
सरकार के अनुसार, केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त सहायता से छत्तीसगढ़ में घरों की छत पर सौर संयंत्र लगाने को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे एक ओर पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम हो रही है, वहीं दूसरी ओर स्वच्छ ऊर्जा को भी बढ़ावा मिल रहा है।
95 हजार से ज्यादा घर सौर ऊर्जा से जुड़े
प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना के तहत छत्तीसगढ़ में 95 हजार से अधिक परिवारों ने रूफटॉप सोलर अपनाया है। योजना के माध्यम से घर की खाली छत को बिजली उत्पादन के साधन में बदला जा रहा है।
सरकार का लक्ष्य केवल सौर पैनल लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसे परिवारों को बढ़ावा देना भी है जो अपनी जरूरत की बिजली खुद पैदा कर सकें और अतिरिक्त उत्पादन को बिजली ग्रिड में भेज सकें।
बिजली बिल में मिल रही राहत
सोलर पैनल लगाने वाले कई परिवारों के बिजली खर्च में उल्लेखनीय कमी देखने को मिली है।
खैरागढ़ क्षेत्र के दिवाकर लोधी ने अपने घर पर 3 किलोवाट का सौर संयंत्र लगाया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनके घर का करीब 1,200 रुपये का मासिक बिजली बिल शून्य हो गया। उनके संयंत्र से 203 यूनिट बिजली उत्पादन के साथ 510 रुपये का सौर रिबेट भी मिला।
इसी तरह बिलासपुर के चांटीडीह निवासी अशोक कुमार साहू ने 3 और 4 किलोवाट क्षमता के सौर पैनल लगाए। रिपोर्ट के अनुसार, इससे गर्मी के मौसम में उनके बिजली खर्च में करीब 3,500 रुपये प्रतिमाह तक की बचत हुई।
सब्सिडी से सोलर लगाना हुआ आसान
प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना में आवासीय उपभोक्ताओं को केंद्र सरकार की ओर से वित्तीय सहायता दी जाती है। केंद्र की योजना के अनुसार, 1 किलोवाट संयंत्र पर ₹30,000, 2 किलोवाट पर ₹60,000 और 3 किलोवाट या उससे अधिक क्षमता पर अधिकतम ₹78,000 तक केंद्रीय सहायता का प्रावधान है।
छत्तीसगढ़ में इसके अलावा राज्य सरकार की ओर से भी अतिरिक्त सहायता दिए जाने की जानकारी सामने आई है। कुछ लाभार्थियों को केंद्र और राज्य दोनों स्तरों से सहायता मिलने से सोलर संयंत्र लगाने की लागत का बोझ कम हुआ है।
3 किलोवाट का संयंत्र कितना काम आ सकता है?
केंद्र सरकार के अनुसार, 3 किलोवाट क्षमता वाला रूफटॉप सोलर सिस्टम औसतन हर महीने 300 से अधिक यूनिट बिजली पैदा कर सकता है। इससे परिवार अपनी बिजली की जरूरतों को काफी हद तक सौर ऊर्जा से पूरा कर सकता है।
हालांकि, वास्तविक उत्पादन धूप की उपलब्धता, मौसम, छत की दिशा, पैनल की क्षमता और अन्य परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
अतिरिक्त बिजली ग्रिड में देने का भी विकल्प
सोलर पैनल से घर की जरूरत से अधिक बिजली पैदा होने पर अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में भेजा जा सकता है। इससे परिवार केवल बिजली का उपभोक्ता नहीं रहता, बल्कि बिजली उत्पादन में भी भागीदार बनता है।
इसी बदलाव को सरकार ‘उपभोक्ता से ऊर्जादाता’ बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में देख रही है।
2026-27 में 70 हजार नए सोलर संयंत्र लगाने का लक्ष्य
छत्तीसगढ़ सरकार ने योजना के विस्तार के लिए आगे के लक्ष्य भी निर्धारित किए हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 में 70 हजार सोलर प्लांट स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है और इसके लिए ₹210 करोड़ का वित्तीय प्रावधान किए जाने की जानकारी सामने आई है। योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड को दी गई है।
स्वच्छ ऊर्जा को मिलेगा बढ़ावा
रूफटॉप सोलर से बिजली उत्पादन बढ़ने के साथ पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। इससे कार्बन उत्सर्जन कम करने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने में भी योगदान मिलता है।
केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना के तहत देशभर में एक करोड़ घरों तक रूफटॉप सोलर पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। योजना का कुल वित्तीय परिव्यय ₹75,021 करोड़ है।
छत्तीसगढ़ में बदल रही ऊर्जा की तस्वीर
छत्तीसगढ़ में 95 हजार से ज्यादा घरों पर सोलर पैनल लगना राज्य के ऊर्जा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। अब घरों की छतें केवल मकान का हिस्सा नहीं, बल्कि बिजली उत्पादन का माध्यम भी बन रही हैं।
बिजली बिल में बचत, सरकारी सहायता और अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में देने की सुविधा के कारण रूफटॉप सोलर परिवारों के लिए आर्थिक रूप से उपयोगी विकल्प बनता जा रहा है।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना के तहत छत्तीसगढ़ में 95 हजार से अधिक घर सौर ऊर्जा से जुड़ चुके हैं। कई परिवारों को इससे बिजली बिल में राहत मिल रही है, जबकि अतिरिक्त बिजली पैदा करने वाले परिवार उसे ग्रिड में भेजकर ‘ऊर्जादाता’ बन रहे हैं। राज्य सरकार ने 2026-27 में भी 70 हजार नए सोलर संयंत्र लगाने का लक्ष्य रखा है। इससे आने वाले समय में छत्तीसगढ़ में घरेलू स्तर पर सौर ऊर्जा का विस्तार और तेज होने की उम्मीद है।
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