छत्तीसगढ़ में 12 जिलों की कमान महिला कलेक्टरों के हाथ, बना नया रिकॉर्ड
छत्तीसगढ़ में महिला प्रशासनिक नेतृत्व ने नया रिकॉर्ड बनाया है। अगस्त 2026 तक राज्य के 12 जिलों की जिम्मेदारी महिला कलेक्टर संभाल रही हैं, यानी एक-तिहाई से अधिक जिलों में महिला आईएएस अधिकारी नेतृत्व कर रही हैं।
छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक ढांचे में महिला नेतृत्व को लेकर एक नया रिकॉर्ड बना है। अगस्त 2026 तक राज्य के 12 जिलों की कमान महिला कलेक्टरों के हाथ में है। यह संख्या प्रदेश के कुल जिलों के एक-तिहाई से अधिक है। प्रशासन में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को राज्य के लिए महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।
इससे पहले मई 2026 में हुए बड़े प्रशासनिक फेरबदल के बाद छत्तीसगढ़ में महिला कलेक्टरों की संख्या बढ़कर 10 हुई थी। उस समय सरकार ने एक साथ कई जिलों में महिला आईएएस अधिकारियों को कलेक्टर की जिम्मेदारी दी थी। अब ताजा बदलावों के बाद यह संख्या 12 तक पहुंच गई है।
12 जिलों में महिला अधिकारियों का नेतृत्व
महिला कलेक्टरों की बढ़ती संख्या को राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था में महिला भागीदारी के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है। इन अधिकारियों को अलग-अलग जिलों में कानून-व्यवस्था, विकास योजनाओं, राजस्व प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और जनकल्याण से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी संभालनी होती है।
मई में हुए प्रशासनिक फेरबदल में कोरिया, बलरामपुर-रामानुजगंज, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, सूरजपुर और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जैसे जिलों में महिला आईएएस अधिकारियों को कलेक्टर बनाया गया था।
मई में 42 से अधिक अधिकारियों का हुआ था फेरबदल
छत्तीसगढ़ सरकार ने मई 2026 में बड़े प्रशासनिक फेरबदल के तहत 40 से अधिक आईएएस अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया था। इस फेरबदल में कई जिला कलेक्टर बदले गए और महत्वपूर्ण विभागों में भी नई नियुक्तियां की गईं।
इस दौरान वरिष्ठ आईएएस अधिकारी निहारिका बारिक को गृह एवं जेल विभाग की जिम्मेदारी दी गई थी। वहीं कई जिलों में महिला अधिकारियों को जिला प्रशासन की कमान सौंपी गई।
किन जिलों में महिला कलेक्टरों को मिली जिम्मेदारी?
मई के फेरबदल में महिला अधिकारियों को जिन प्रमुख जिलों की जिम्मेदारी मिली, उनमें शामिल थे:
- कोरिया — पुष्पा साहू
- बलरामपुर-रामानुजगंज — चंदन संजय त्रिपाठी
- मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर — संतन देवी जांगड़े
- सूरजपुर — रीना जमील
- सारंगढ़-बिलाईगढ़ — पद्मिनी भोई साहू
इन नियुक्तियों के जरिए विशेष रूप से सरगुजा और बिलासपुर संभाग के कई जिलों में महिला प्रशासनिक नेतृत्व मजबूत हुआ था।
महिला नेतृत्व को मिल रहा बढ़ावा
छत्तीसगढ़ में महिला आईएएस अधिकारियों को जिला प्रशासन और महत्वपूर्ण विभागों में जिम्मेदारी मिलने से महिला नेतृत्व को बढ़ावा मिलने की बात सामने आई है। प्रशासनिक स्तर पर यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जिला कलेक्टर की भूमिका सीधे तौर पर आम जनता और सरकार के बीच समन्वय से जुड़ी होती है।
महिला अधिकारियों के नेतृत्व में जिलों में सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन, जनसुनवाई, राजस्व मामलों का निपटारा, महिला एवं बाल कल्याण, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे विषयों पर भी प्रशासनिक प्राथमिकताएं तय की जाती हैं।
‘नारी नेतृत्व’ की दिशा में बड़ा कदम
महिला कलेक्टरों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी को राज्य सरकार की महिला नेतृत्व को आगे बढ़ाने की नीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है। मई में 10 महिला कलेक्टरों की नियुक्ति को भी प्रशासन में ‘नारी नेतृत्व’ को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया था।
अब 12 जिलों में महिला कलेक्टरों की मौजूदगी इस बदलाव को और मजबूत करती है। यह आंकड़ा बताता है कि राज्य प्रशासन में महिलाओं को केवल सामाजिक कल्याण से जुड़े विभागों तक सीमित रखने के बजाय मैदानी प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी दी जा रही हैं।
प्रशासन में बढ़ रही महिलाओं की भागीदारी
आईएएस जैसी उच्च प्रशासनिक सेवाओं में महिलाओं की भागीदारी पिछले वर्षों में लगातार बढ़ी है। जिला कलेक्टर के पद पर जिम्मेदारी मिलना किसी भी अधिकारी के लिए महत्वपूर्ण प्रशासनिक दायित्व माना जाता है।
छत्तीसगढ़ में 12 जिलों की कमान महिला अधिकारियों के हाथ में होना राज्य की नौकरशाही में महिला नेतृत्व की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। आने वाले समय में प्रशासनिक फेरबदल के साथ यह संख्या और बदल सकती है।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ में 12 महिला कलेक्टरों का एक साथ जिलों का नेतृत्व करना प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे महिला अधिकारियों की बढ़ती भूमिका और निर्णय लेने वाली जिम्मेदारियों में उनकी भागीदारी सामने आती है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2026 में राज्य के एक-तिहाई से अधिक जिलों की कमान महिला कलेक्टरों के पास है।
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