चंद्रयान-4 मिशन: चंद्रमा के साउथ पोल पर मॉन्स माउटन पहाड़ पर उतरेगा इसरो, मिट्टी और चट्टान के नमूने लाए जाएंगे
इसरो चंद्रयान-4 मिशन की तैयारी में जुटा है। मिशन के तहत चंद्रमा के साउथ पोल स्थित मॉन्स माउटन क्षेत्र में लैंडिंग की योजना है, जहां से मिट्टी और चट्टानों के नमूने पृथ्वी पर लाए जाएंगे। यह मिशन भारत के अंतरिक्ष अनुसंधान में नया इतिहास रच सकता है।
चंद्रयान-4 मिशन: चंद्रमा के साउथ पोल पर मॉन्स माउटन पर उतरेगा इसरो, मिट्टी और चट्टानों के नमूने लाने की तैयारी
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अपने अगले बड़े चंद्र मिशन चंद्रयान-4 को लेकर तेज़ी से तैयारी कर रहा है। यह मिशन भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए ऐतिहासिक माना जा रहा है, क्योंकि इसका उद्देश्य सिर्फ चंद्रमा पर उतरना ही नहीं बल्कि वहां से मिट्टी और चट्टानों के नमूने पृथ्वी पर वापस लाना है।
इसरो वैज्ञानिकों ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव (South Pole) में स्थित मॉन्स माउटन (Mons Mouton) क्षेत्र को संभावित लैंडिंग साइट के रूप में चुना है। यह वही क्षेत्र है जिसे वैज्ञानिक चंद्र अनुसंधान के लिहाज से बेहद अहम मानते हैं।
क्या है मॉन्स माउटन और क्यों चुना गया?
मॉन्स माउटन चंद्रमा के साउथ पोल में स्थित एक पर्वतीय क्षेत्र है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस क्षेत्र में चंद्रमा की प्राचीन सतह के कई रहस्य छिपे हो सकते हैं।
इस क्षेत्र की खासियत
यहां सूर्य की रोशनी सीमित समय के लिए पहुंचती है।
कुछ हिस्सों में स्थायी छाया रहती है, जहां पानी की बर्फ मिलने की संभावना ज्यादा होती है।
यह क्षेत्र भूगर्भीय रूप से काफी पुराना माना जाता है, जिससे चंद्रमा के निर्माण और विकास की जानकारी मिल सकती है।
चंद्रयान-4 मिशन का मुख्य उद्देश्य
सैंपल रिटर्न मिशन
चंद्रयान-4 का सबसे बड़ा लक्ष्य चंद्रमा की सतह से मिट्टी और चट्टानों के नमूने एकत्र करना और उन्हें पृथ्वी पर लाना है। यह तकनीक बेहद जटिल मानी जाती है क्योंकि इसमें कई चरण शामिल होते हैं।
चंद्रमा की संरचना का अध्ययन
वैज्ञानिक नमूनों का अध्ययन कर यह जानने की कोशिश करेंगे कि चंद्रमा की सतह कैसे बनी और उसमें कौन-कौन से खनिज मौजूद हैं।
पानी और संसाधनों की खोज
मिशन का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य यह भी है कि चंद्रमा पर मौजूद पानी और अन्य प्राकृतिक संसाधनों की संभावनाओं का अध्ययन किया जा सके।
मिशन कैसे करेगा काम?
चंद्रयान-4 को कई हिस्सों में डिजाइन किया जा सकता है, जिसमें शामिल होंगे:
लैंडर: चंद्रमा की सतह पर सुरक्षित उतरने के लिए
रोवर: सतह पर घूमकर नमूने इकट्ठा करने के लिए
असेंट मॉड्यूल: नमूनों को लेकर चंद्रमा से उड़ान भरने के लिए
रिटर्न मॉड्यूल: नमूनों को पृथ्वी तक सुरक्षित लाने के लिए
यह पूरी प्रक्रिया अंतरिक्ष तकनीक के सबसे चुनौतीपूर्ण अभियानों में से एक मानी जाती है।
चंद्रयान-3 के बाद अगला बड़ा कदम
चंद्रयान-3 की सफलता के बाद भारत ने साउथ पोल पर सॉफ्ट लैंडिंग कर इतिहास रचा था। अब चंद्रयान-4 इस सफलता को आगे बढ़ाते हुए भारत को उन देशों की सूची में शामिल कर सकता है जिन्होंने चंद्रमा से नमूने वापस लाने में सफलता हासिल की है।
अब तक यह उपलब्धि केवल अमेरिका, रूस और चीन जैसे देशों को ही मिली है।
भारत के लिए क्यों अहम है मिशन?
वैज्ञानिक उपलब्धि
इस मिशन से चंद्रमा के इतिहास और भूगर्भीय संरचना से जुड़े नए तथ्य सामने आ सकते हैं।
तकनीकी मजबूती
सैंपल रिटर्न तकनीक भविष्य में मानव मिशनों के लिए बेहद जरूरी मानी जाती है।
वैश्विक पहचान
मिशन सफल होने पर भारत अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में विश्व की अग्रणी शक्तियों में और मजबूत स्थिति बना सकता है।
भविष्य की योजनाओं पर असर
चंद्रयान-4 से मिलने वाली जानकारी भविष्य में चंद्रमा पर मानव मिशन, अंतरिक्ष स्टेशन और संसाधन उपयोग जैसी योजनाओं में अहम भूमिका निभा सकती है। यह मिशन भारत के गगनयान और अन्य डीप स्पेस मिशनों के लिए भी रास्ता तैयार करेगा।
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