NALSAR Row: BCI ने वापस लिया छात्रों के नामांकन रोकने का आदेश, कॉकरोच जनता पार्टी ने किया था विरोध

NALSAR यूनिवर्सिटी के 2026 बैच के छात्रों के अधिवक्ता नामांकन पर रोक लगाने वाले बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के आदेश को भारी विरोध के बाद वापस ले लिया गया। कॉकरोच जनता पार्टी और कानूनी समुदाय ने फैसले की आलोचना की थी।

Aug 14, 2026 - 12:41
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NALSAR Row: BCI ने वापस लिया छात्रों के नामांकन रोकने का आदेश, कॉकरोच जनता पार्टी ने किया था विरोध

नई दिल्ली: हैदराबाद स्थित नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज़ एंड रिसर्च (NALSAR) को लेकर बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) और कानून के छात्रों के बीच शुरू हुआ विवाद गुरुवार को नया मोड़ ले गया। BCI ने पहले NALSAR के 2026 बैच के सभी छात्रों के अधिवक्ता के रूप में नामांकन पर रोक लगाने का आदेश जारी किया, लेकिन कुछ ही घंटों बाद भारी विरोध और आलोचना के बीच उसे वापस लेना पड़ा।

क्या था विवाद?

विवाद की शुरुआत तब हुई जब NALSAR के कुछ छात्रों ने विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति सूर्यकांत को मुख्य अतिथि के रूप में बुलाए जाने का विरोध किया। इसके बाद BCI अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने सभी राज्य बार काउंसिलों को निर्देश दिया कि NALSAR के 2026 बैच के किसी भी छात्र का अधिवक्ता के रूप में नामांकन अगली सूचना तक न किया जाए।

BCI ने यह भी कहा था कि विश्वविद्यालय प्रशासन उन छात्रों और शिक्षकों की पहचान करे जिन्होंने कथित रूप से इस अभियान का नेतृत्व किया।

कॉकरोच जनता पार्टी ने किया तीखा विरोध

BCI के फैसले के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) खुलकर सामने आई। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाते हुए कहा, “अगर सारे कानूनी कॉकरोच एक साथ आ जाएं तो क्या होगा?” उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आदेश वापस नहीं लिया गया तो देशभर के कानून छात्र, वकील और युवा प्रदर्शन करेंगे।

CJP ने इस फैसले को सामूहिक दंड (Collective Punishment) करार देते हुए कहा कि पूरे बैच को सजा देना न्यायसंगत नहीं है।

कानूनी समुदाय से भी विरोध

BCI के आदेश के खिलाफ वरिष्ठ वकीलों, बार एसोसिएशनों और कानूनी विशेषज्ञों ने भी आपत्ति जताई। आलोचकों का कहना था कि छात्रों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के कारण उनके पेशेवर भविष्य को प्रभावित नहीं किया जा सकता। कई लोगों ने इसे अत्यधिक और असंगत कार्रवाई बताया।

कुछ घंटों में ही पलटा फैसला

विरोध बढ़ने के बाद BCI ने अपने आदेश में संशोधन करते हुए स्पष्ट किया कि NALSAR के 2026 बैच के सभी छात्र अब अपनी पसंद की किसी भी राज्य बार काउंसिल में नामांकन करा सकेंगे। हालांकि मामले की जांच जारी रहेगी और आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी।

BCI अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने बाद में कहा कि अधिकांश छात्र इस विवाद में शामिल नहीं थे और निर्दोष छात्रों को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट की भी टिप्पणी

मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने BCI की कार्रवाई पर सवाल उठाए। अदालत ने संकेत दिया कि छात्रों और न्यायपालिका के बीच संवाद का विषय अलग है तथा नियामक संस्थाओं को छात्रों के अधिकारों का सम्मान करना चाहिए।

निष्कर्ष

NALSAR विवाद ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, छात्र अधिकारों और पेशेवर नियामक संस्थाओं की भूमिका को लेकर नई बहस छेड़ दी है। फिलहाल छात्रों के नामांकन पर लगी रोक हट चुकी है, लेकिन इस पूरे मामले की जांच जारी रहेगी।

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