Karur Tragedy Case: सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले पर लगाई रोक, पीड़ित परिवारों की नौकरियां बरकरार
सुप्रीम कोर्ट ने करूर भगदड़ त्रासदी के पीड़ित परिवारों को दी गई सरकारी नौकरियां रद्द करने वाले मद्रास हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि सरकार राहत देने का फैसला करे तो इसमें समस्या क्या है।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने करूर भगदड़ त्रासदी में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को दी गई अनुकंपा नियुक्तियों को रद्द करने वाले मद्रास हाईकोर्ट के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है। इस फैसले से तमिलनाडु सरकार और पीड़ित परिवारों को बड़ी राहत मिली है।
न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि यदि किसी त्रासदी में परिवार का कमाने वाला सदस्य मर जाता है और सरकार उसके परिवार को राहत देने के लिए नौकरी देना चाहती है, तो इसमें आपत्ति क्यों होनी चाहिए। अदालत ने यह भी सवाल किया कि सरकार की नीतिगत निर्णयों पर इस प्रकार सवाल उठाने का आधार क्या है।
क्या है मामला?
सितंबर 2025 में तमिलनाडु के करूर जिले में एक राजनीतिक रैली के दौरान हुई भगदड़ में 41 लोगों की मौत हो गई थी। घटना के बाद राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता के साथ-साथ सरकारी नौकरी देने का फैसला किया था। इसके तहत 32 पात्र परिजनों को नियुक्ति आदेश जारी किए गए थे।
हालांकि, मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ ने जुलाई 2026 में इन नियुक्तियों को रद्द कर दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि सार्वजनिक नौकरियां संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत समान अवसर और समानता के सिद्धांतों का पालन करते हुए दी जानी चाहिए। अदालत ने यह भी कहा था कि पहले से कई लोग अनुकंपा नियुक्ति की प्रतीक्षा सूची में हैं, इसलिए इस प्रकार विशेष श्रेणी बनाकर नियुक्तियां देना उचित नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि सरकार किसी बड़ी त्रासदी के पीड़ित परिवारों को आर्थिक मुआवजा दे सकती है, तो रोजगार देकर भी राहत प्रदान कर सकती है। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि यह मामला मानवीय सहायता और राहत से जुड़ा हुआ है।
आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। अब मामले की विस्तृत सुनवाई के बाद शीर्ष अदालत यह तय करेगी कि करूर त्रासदी पीड़ितों के परिजनों को दी गई अनुकंपा नियुक्तियां कानूनी रूप से वैध हैं या नहीं।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश से पीड़ित परिवारों को मिली सरकारी नौकरियां बरकरार रहेंगी और राज्य सरकार को भी अस्थायी राहत मिल गई है।
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