स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव, 118 सांसदों ने दिया नोटिस

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया है। 118 सांसदों के हस्ताक्षर वाले इस प्रस्ताव से संसद में सियासी हलचल तेज हो गई है।

Feb 10, 2026 - 15:12
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स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव, 118 सांसदों ने दिया नोटिस
118 सांसद एकजुट, स्पीकर बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव से गरमाई राजनीति

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्षी दलों ने अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस देकर संसद की राजनीति को गरमा दिया है। विपक्ष का दावा है कि इस प्रस्ताव पर 118 सांसदों के हस्ताक्षर हैं, जो सदन के भीतर स्पीकर की कार्यप्रणाली पर असंतोष को दर्शाता है। इस घटनाक्रम के बाद संसद के आगामी सत्र में तीखी राजनीतिक टकराव की संभावना बढ़ गई है।

विपक्ष ने लगाए ये आरोप

विपक्षी दलों का आरोप है कि स्पीकर ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं दिखाई और कई अहम मुद्दों पर विपक्ष को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला। विपक्ष का कहना है कि संसद लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंच है और यहां सभी दलों को समान अवसर मिलना चाहिए।

इसके अलावा विपक्ष ने कुछ विधेयकों को जल्दबाजी में पारित कराने और चर्चा का समय सीमित करने को भी मुद्दा बनाया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि स्पीकर को सभी पक्षों के बीच संतुलन बनाए रखना चाहिए, लेकिन हाल के घटनाक्रमों में यह संतुलन कमजोर दिखा है।

संसदीय नियम क्या कहते हैं

लोकसभा के नियमों के अनुसार, स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए सांसदों का पर्याप्त समर्थन जरूरी होता है। नोटिस स्वीकार होने के बाद इस पर सदन में चर्चा और मतदान कराया जाता है। यदि बहुमत सांसद प्रस्ताव के पक्ष में मतदान करते हैं, तो स्पीकर को पद छोड़ना पड़ सकता है। हालांकि ऐसा होना दुर्लभ माना जाता है, क्योंकि आमतौर पर सत्तापक्ष का समर्थन स्पीकर को मिलता है।

सत्तापक्ष का जवाब

सत्तारूढ़ दल ने विपक्ष के इस कदम को पूरी तरह राजनीतिक बताया है। सरकार का कहना है कि स्पीकर ओम बिरला ने हमेशा संसदीय परंपराओं और नियमों का पालन करते हुए सदन का संचालन किया है। सत्तापक्ष के नेताओं का कहना है कि विपक्ष जनता के मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है।

राजनीतिक असर और आगे की रणनीति

इस अविश्वास प्रस्ताव से संसद के भीतर सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव और तेज हो सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भले ही प्रस्ताव पास होने की संभावना कम हो, लेकिन यह विपक्ष के लिए सरकार और स्पीकर की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने का बड़ा मंच बन सकता है।

आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद की कार्यवाही और राष्ट्रीय राजनीति दोनों पर असर डाल सकता है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रस्ताव पर चर्चा कब होती है और सदन में किस तरह की राजनीतिक रणनीति देखने को मिलती है।

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