छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: अनुकंपा नियुक्ति में बड़े बच्चे को प्राथमिकता
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि एक से अधिक पात्र दावेदार होने पर बड़े बच्चे के दावे को पहले देखा जाए। दूसरी पत्नी की संतान को भी केवल इस आधार पर बाहर नहीं किया जा सकता।
बिलासपुर: अनुकंपा नियुक्ति को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी मृत सरकारी कर्मचारी के एक से अधिक बच्चे अनुकंपा नियुक्ति के लिए पात्र हैं, तो उम्र में बड़े बच्चे के दावे पर पहले विचार किया जाना चाहिए। साथ ही, दूसरी पत्नी से जन्मे बच्चे को केवल इस आधार पर अनुकंपा नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता।
यह मामला मुंगेली जिले के एक सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के बाद अनुकंपा नियुक्ति को लेकर सामने आया था। मामले में मृत कर्मचारी के दोनों बेटों ने नौकरी के लिए दावा किया था। विभाग ने छोटे बेटे को नियुक्ति दे दी थी, जिसके बाद बड़े बेटे ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
क्या है पूरा मामला?
मामला मुंगेली जिले के एक शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में चपरासी के पद पर कार्यरत ईश्वर सिंह क्षत्रिय से जुड़ा है। उनकी 29 सितंबर 2016 को सेवा के दौरान मृत्यु हो गई थी।
ईश्वर सिंह के दो विवाह हुए थे। पहली पत्नी से उनके बड़े बेटे जितेंद्र सिंह क्षत्रिय और दूसरी पत्नी से छोटे बेटे राजकुमार का जन्म हुआ था। पिता की मृत्यु के बाद दोनों बेटों ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया।
हालांकि, मुंगेली के जिला शिक्षा अधिकारी ने 7 अगस्त 2019 को छोटे बेटे राजकुमार को अनुकंपा नियुक्ति दे दी। बड़े बेटे जितेंद्र ने इस नियुक्ति को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि वह उम्र में बड़ा है और उसके दावे पर पहले विचार किया जाना चाहिए।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि यदि एक ही श्रेणी में एक से अधिक बच्चे अनुकंपा नियुक्ति के लिए पात्र हैं, तो ज्येष्ठ यानी बड़े बच्चे के दावे को प्राथमिकता के साथ देखा जाना चाहिए।
अदालत ने छोटे बेटे को दी गई नियुक्ति का आदेश रद्द करते हुए मामले को दोबारा संबंधित अधिकारी के पास भेज दिया। अदालत ने निर्देश दिया कि बड़े बेटे जितेंद्र की पात्रता की जांच कर उसके दावे पर 30 दिनों के भीतर उचित निर्णय लिया जाए।
दूसरी पत्नी की संतान भी हो सकती है पात्र
इस फैसले का एक महत्वपूर्ण पहलू दूसरी पत्नी की संतान से जुड़ा है। अदालत ने माना कि केवल यह तथ्य कि बच्चा कर्मचारी की दूसरी पत्नी से पैदा हुआ है, उसे अनुकंपा नियुक्ति के दायरे से बाहर करने का आधार नहीं हो सकता।
अर्थात यदि दूसरी पत्नी से जन्मा बच्चा अन्य निर्धारित शर्तों को पूरा करता है, तो उसके दावे पर भी विचार किया जा सकता है। हालांकि, यदि एक से अधिक बच्चे समान रूप से पात्र हैं, तो बड़े बच्चे के दावे को पहले देखा जाएगा।
शादीशुदा होने से भी दावा खत्म नहीं होता
अदालत ने यह भी महत्वपूर्ण बात कही कि केवल शादीशुदा होने के आधार पर आश्रित संतान को अनुकंपा नियुक्ति के अधिकार से बाहर नहीं किया जा सकता। यदि उम्मीदवार अनुकंपा नियुक्ति के लिए निर्धारित अन्य पात्रता शर्तों को पूरा करता है, तो उसके वैवाहिक होने मात्र से दावा खारिज नहीं किया जा सकता।
विभाग को 30 दिन में करना होगा फैसला
हाईकोर्ट ने मामले को संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी के पास वापस भेजते हुए निर्देश दिया है कि बड़े बेटे की पात्रता और दावे की नए सिरे से जांच की जाए। इसके बाद निर्धारित समय के भीतर उचित निर्णय लिया जाना है।
फैसले का क्या होगा असर?
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का यह फैसला उन परिवारों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के बाद एक से अधिक बच्चे अनुकंपा नियुक्ति के लिए दावा करते हैं।
फैसले से यह स्पष्ट होता है कि ऐसे मामलों में विभाग को केवल अपनी सुविधा के आधार पर किसी एक दावेदार को नियुक्ति देने के बजाय पात्रता, पारिवारिक स्थिति और बच्चों की वरिष्ठता जैसे पहलुओं पर विचार करना होगा।
हालांकि, अनुकंपा नियुक्ति कोई स्वतः मिलने वाला अधिकार नहीं है। संबंधित सरकारी योजना और उस मामले में लागू पात्रता शर्तों के अनुसार ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के इस फैसले ने ऐसे मामलों में दावेदारों के बीच प्राथमिकता तय करने के लिए महत्वपूर्ण दिशा जरूर दी है।
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