सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: छत्तीसगढ़ कस्टोडियल डेथ मामले की CBI जांच के आदेश, अधिकारियों को लगाई फटकार

छत्तीसगढ़ के कस्टोडियल डेथ मामले में सुप्रीम कोर्ट ने CBI जांच के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने राज्य के DGP और अन्य अधिकारियों पर मामले को दबाने की कोशिश का आरोप लगाते हुए कड़ी टिप्पणी की और मृतक के परिजनों को 25 लाख रुपये अंतरिम मुआवजा देने का निर्देश दिया।

Aug 13, 2026 - 13:07
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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: छत्तीसगढ़ कस्टोडियल डेथ मामले की CBI जांच के आदेश, अधिकारियों को लगाई फटकार

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: छत्तीसगढ़ कस्टोडियल डेथ मामले की CBI जांच के आदेश, अधिकारियों को लगाई फटकार

नई दिल्ली/रायपुर। छत्तीसगढ़ में कथित कस्टोडियल डेथ (हिरासत में मौत) के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दी है। शीर्ष अदालत ने राज्य पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए और कहा कि मामले में सच्चाई छिपाने की कोशिश की गई।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से प्रस्तुत स्पष्टीकरण को अस्वीकार करते हुए इसे “कवर-अप” यानी मामले को दबाने का प्रयास बताया। अदालत ने कहा कि उपलब्ध तथ्यों से यह स्पष्ट होता है कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए स्वतंत्र एजेंसी की आवश्यकता है।

क्या है मामला?

मामला बिलासपुर जिले से जुड़ा है, जहां एक व्यक्ति की पुलिस हिरासत के बाद मौत हो गई थी। न्यायिक जांच में मौत को संदिग्ध परिस्थितियों से जुड़ा बताया गया था। इसके बावजूद लंबे समय तक प्राथमिकी दर्ज नहीं होने और उचित कार्रवाई नहीं किए जाने पर मृतक के परिजनों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।

DGP और अधिकारियों पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों, जिनमें पुलिस महानिदेशक (DGP) भी शामिल थे, के जवाबों पर अदालत ने नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों द्वारा दी गई दलीलें स्वीकार्य नहीं हैं और यह प्रतीत होता है कि मामले की वास्तविकता को छिपाने का प्रयास किया गया।

अदालत ने यह भी कहा कि न्यायिक जांच रिपोर्ट और पोस्टमार्टम से सामने आए तथ्यों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसलिए मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

CBI को तत्काल केस दर्ज करने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने CBI निदेशक को निर्देश दिया है कि वे तत्काल नियमित आपराधिक मामला दर्ज कर जांच शुरू करें। अदालत ने यह भी कहा कि जांच किसी वरिष्ठ अधिकारी की निगरानी में की जाए और उसकी प्रगति रिपोर्ट अगली सुनवाई में प्रस्तुत की जाए।

परिजनों को 25 लाख रुपये अंतरिम मुआवजा

मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार को मृतक के परिवार को 25 लाख रुपये का अंतरिम मुआवजा देने का निर्देश भी दिया है। अदालत ने कहा कि यह राशि अंतिम राहत नहीं मानी जाएगी और जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

मामले पर आगे क्या?

अब CBI पूरे घटनाक्रम की जांच करेगी, जिसमें हिरासत में मौत की परिस्थितियों के साथ-साथ उन अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में रहेगी, जिन पर कार्रवाई न करने या मामले को दबाने के आरोप हैं। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कानून के शासन और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए जवाबदेही तय होना आवश्यक है।

यह मामला छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि देशभर में हिरासत में होने वाली मौतों और पुलिस जवाबदेही को लेकर एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।

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