रायपुर विस्थापन: 80 परिवारों को मिले 350 वर्गफीट के फ्लैट, बुजुर्ग और दिव्यांगों के लिए तीसरी मंजिल बनी चुनौती

रायपुर के नकटी गांव में बुलडोजर कार्रवाई के बाद विस्थापित 80 परिवारों को नया रायपुर के EWS फ्लैटों में शिफ्ट किया गया है। छोटे मकानों, लिफ्ट की कमी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव से परिवार नई मुश्किलों का सामना कर रहे हैं।

Jul 2, 2026 - 12:53
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रायपुर विस्थापन: 80 परिवारों को मिले 350 वर्गफीट के फ्लैट, बुजुर्ग और दिव्यांगों के लिए तीसरी मंजिल बनी चुनौती
घर टूटे, नई मुश्किलें शुरू: 350 वर्गफीट के फ्लैट में सिमटी जिंदगी, बुजुर्गों को तीसरी मंजिल चढ़ने की मजबूरी

रायपुर के नकटी गांव में हाल ही में हुई बुलडोजर कार्रवाई के बाद विस्थापित हुए परिवार अब नया रायपुर के सेक्टर-30 स्थित आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) आवासों में नई शुरुआत करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि सिर पर छत मिलने के बावजूद कई परिवारों के सामने अब नई तरह की चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।

पुनर्वास के तहत दिए गए करीब 350 वर्गफीट के फ्लैटों में एक कमरा, छोटा हॉल, रसोई और शौचालय की व्यवस्था है। बड़े परिवारों का कहना है कि सीमित जगह में पूरे घर का सामान रखना और सभी सदस्यों के साथ रहना बेहद कठिन हो रहा है। कई परिवार अभी भी अपने सामान को व्यवस्थित करने में जुटे हैं।

सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्गों, दिव्यांगों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को हो रही है। कई परिवारों को तीसरी मंजिल पर फ्लैट आवंटित किए गए हैं, जबकि इमारतों में लिफ्ट की सुविधा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में रोजमर्रा के कामों के लिए बार-बार सीढ़ियां चढ़ना और उतरना उनके लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

विस्थापित परिवारों का कहना है कि घर बदलने के साथ-साथ आजीविका, घरेलू सामान की व्यवस्था और रोजमर्रा की सुविधाओं को फिर से व्यवस्थित करना आसान नहीं है। कई लोगों का यह भी कहना है कि उनके मवेशी और अन्य जरूरी सामान अब भी पुराने इलाके में बिखरे पड़े हैं, जिन्हें सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना बाकी है।

वहीं प्रशासन का कहना है कि प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की प्रक्रिया जारी है और उन्हें आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर लोग बुनियादी सुविधाओं में सुधार और विशेष जरूरत वाले लोगों के लिए अतिरिक्त व्यवस्था की मांग भी उठा रहे हैं।

फिलहाल विस्थापित परिवार नई जगह पर अपने जीवन को पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन छोटे आवास, सीमित संसाधन और सुविधाओं की कमी उनके सामने बड़ी चुनौती बनकर खड़ी है।

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