छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज कांग्रेस का अविश्वास प्रस्ताव: नकटी मुद्दे समेत कई सवालों पर सरकार को घेरेगा विपक्ष, संख्या बल BJP के पक्ष में
छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में कांग्रेस आज विष्णुदेव साय सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश करेगी। राज्य गठन के बाद यह 10वां अविश्वास प्रस्ताव होगा। जानिए इसकी अहमियत, विधानसभा का गणित और किन मुद्दों पर सरकार को घेरा जाएगा।
छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन कांग्रेस मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश करेगी। राज्य गठन के बाद यह विधानसभा में लाया जाने वाला 10वां अविश्वास प्रस्ताव होगा।
सदन में आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद विधानसभा अध्यक्ष अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा की तारीख तय करेंगे। हालांकि, मौजूदा विधानसभा में संख्या बल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पक्ष में होने के कारण प्रस्ताव के पारित होने की संभावना कम मानी जा रही है।
प्रश्नकाल की शुरुआत जल जीवन मिशन से
सत्र की शुरुआत प्रश्नकाल से हुई। भाजपा विधायक भैय्यालाल राजवाड़े ने जल जीवन मिशन का मुद्दा उठाया। इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने हल्के अंदाज में टिप्पणी करते हुए कहा कि "सचिन तेंदुलकर बहुत दिनों बाद बल्लेबाजी के लिए उतरे हैं, पुराने खिलाड़ी हैं।"
किन मुद्दों पर सरकार को घेरेगी कांग्रेस?
अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सरकार को कई मुद्दों पर घेरने की तैयारी में है। इनमें प्रमुख रूप से—
- नकटी गांव में बुलडोजर कार्रवाई
- कानून-व्यवस्था
- किसानों की समस्याएं
- बेरोजगारी
- भ्रष्टाचार के आरोप
- विभिन्न प्रशासनिक मुद्दे
शामिल बताए जा रहे हैं।
वहीं, सत्ता पक्ष अपनी योजनाओं, विकास कार्यों और प्रशासनिक उपलब्धियों को सदन में रखकर विपक्ष के आरोपों का जवाब देगा।
अविश्वास प्रस्ताव क्यों होता है महत्वपूर्ण?
अविश्वास प्रस्ताव का उद्देश्य केवल सरकार गिराना नहीं होता। यह विपक्ष को सरकार की नीतियों, निर्णयों और पूरे कार्यकाल पर विस्तृत चर्चा करने का अवसर देता है। बहस के बाद मतदान कराया जाता है। यदि सरकार के पक्ष में बहुमत रहता है तो प्रस्ताव स्वतः अस्वीकार हो जाता है।
क्या कहता है विधानसभा का गणित?
वर्तमान विधानसभा में—
- भाजपा – 54 विधायक
- कांग्रेस – 35 विधायक
- गोंडवाना गणतंत्र पार्टी – 1 विधायक
संख्या बल के आधार पर सरकार को बहुमत प्राप्त है। ऐसे में अविश्वास प्रस्ताव का राजनीतिक महत्व अधिक माना जा रहा है, जबकि संख्यात्मक स्थिति सरकार के पक्ष में दिखाई देती है।
अब तक कभी नहीं गिर सकी सरकार
छत्तीसगढ़ विधानसभा के इतिहास में इससे पहले 9 बार अविश्वास प्रस्ताव लाए जा चुके हैं, लेकिन कोई भी प्रस्ताव सफल नहीं हुआ।
मुख्य घटनाक्रम—
- 2002 और 2003 – अजीत जोगी सरकार के खिलाफ भाजपा ने प्रस्ताव लाया।
- 2007, 2011, 2015, 2017 और 2018 – डॉ. रमन सिंह सरकार के खिलाफ कांग्रेस ने प्रस्ताव पेश किया।
- 2022 और 2023 – भूपेश बघेल सरकार के खिलाफ भाजपा ने अविश्वास प्रस्ताव लाया।
हर बार संबंधित सरकार ने सदन में बहुमत साबित किया और प्रस्ताव गिर गया।
2015 में हुई थी सबसे लंबी बहस
विधानसभा के इतिहास में सबसे लंबी चर्चा जुलाई 2015 में डॉ. रमन सिंह सरकार के खिलाफ आए अविश्वास प्रस्ताव पर हुई थी। यह बहस 24 घंटे 25 मिनट तक चली थी।
प्रश्नकाल में उठेंगे कई अहम मुद्दे
अविश्वास प्रस्ताव के अलावा प्रश्नकाल में भी कई महत्वपूर्ण विषयों पर सरकार से जवाब मांगा जाएगा। इनमें—
- जल जीवन मिशन
- रायपुर की पेयजल व्यवस्था
- औद्योगिक दुर्घटनाओं की जांच
- शराब दुकानों का संचालन
- सरकारी आयोजनों पर खर्च
- प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पद
जैसे मुद्दे शामिल हैं।
पहले दिन भी हुआ था हंगामा
मानसून सत्र के पहले दिन राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे में कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर सदन में तीखी नोकझोंक हुई थी। विपक्षी कांग्रेस के विधायकों ने इस मुद्दे को लेकर विरोध दर्ज कराया, जिसके चलते सदन में हंगामे की स्थिति बनी।
आज की कार्यवाही पर नजर
आज का दिन विधानसभा की राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, संख्या बल सरकार के पक्ष में है, लेकिन अविश्वास प्रस्ताव पर होने वाली चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विभिन्न मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिल सकती है।
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