छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में जल जीवन मिशन के कार्यों में कमीशनखोरी का मामला सामने आया

Jan 6, 2026 - 09:08
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छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में जल जीवन मिशन के कार्यों में कमीशनखोरी का मामला सामने आया

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में जल जीवन मिशन के कार्यों में कमीशनखोरी का मामला सामने आया है। ठेकेदारों से काम के बिल पास करवाने के नाम पर 10 प्रतिशत कमीशन मांगने का वीडियो वायरल हो रहा है। यह वीडियो एक युवा ठेकेदार ने जारी किया है।

परेशान ठेकेदार नवीन वर्मा ने पाटन ब्लॉक के SDO एम.ए. खान पर बिल पास करवाने के नाम पर रिश्वत मांगने का आरोप लगाया है। ठेकेदार ने कहा है कि बिल पास कराने के बदले उनसे लगातार कमीशन की मांग की गई। वीडियो वायरल होने के बाद विभाग संबंधित अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

बिल पास होने के बाद मांगा कमीशन

भिलाई में रहने वाले सिविल इंजीनियर नवीन वर्मा ने बताया कि उन्होंने साल 2022 में अपने एक साथी के साथ पार्टनरशिप में ठेकेदारी शुरू की थी। उनका पहला काम पाटन ब्लॉक के ग्राम घुघवा में जल जीवन मिशन के तहत 53 लाख रुपए की लागत से पानी की टंकी निर्माण और घर-घर पाइपलाइन के जरिए पानी पहुंचाने का था।

नवीन ने बताया कि काम पूरा होने के बाद एक साल बाद उनका बिल आया। काम करने के लिए उन्होंने ब्याज पर पैसा लिया था। जब बिल आया तो कमीशन की मांग की गई।

दोनों बिल पास करवाने के नाम पर दिया कमीशन

नवीन के मुताबिक, पहला रनिंग बिल पास कराने के दौरान SDO एम.ए. खान ने 10 प्रतिशत कमीशन की मांग की। आरोप है कि कमीशन नहीं देने पर बिल रोकने और काम में खामियां निकालने की धमकी दी गई।

मजबूरी में नवीन ने ब्याज पर पैसा उधार लेकर करीब 1 लाख 60 हजार रुपए कमीशन के रूप में दिए, जिसके बाद पहला बिल पास हुआ। यही सिलसिला आगे भी चलता रहा।

दूसरे बिल के समय भी 10 प्रतिशत कमीशन मांगा गया और करीब 50 हजार रुपए देने पड़े।

2 लाख से ज्यादा कमीशन दिए

ठेकेदार का आरोप है कि अब तक लगभग 35 लाख रुपए का भुगतान हुआ है, जबकि कुल कमीशन के तौर पर करीब 2 से ढाई लाख रुपए दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद करीब 40 प्रतिशत भुगतान, यानी 18 से 20 लाख रुपए, महीनों से लंबित है। ठेकेदार ने पैसे देते वक्त भविष्य में खुद के बचाव के लिए वीडियो बना लिया था।

नवीन का कहना है कि भुगतान में देरी के चलते उन्हें भारी ब्याज पर कर्ज लेना पड़ा और आर्थिक स्थिति बद से बदतर हो गई। उन्होंने बताया कि जब उनकी आर्थिक हालत और बिगड़ गई और उन्होंने कमीशन देना बंद कर दिया।

कमीशन देना बंद किया तो करने लगे परेशान

ठेकेदार ने जब कमीशन देना बंद किया तो उसके बाद उन्हें और अधिक परेशान किया जाने लगा। फाइल वर्क अधूरा रखा गया, कई-कई दिन तक संबंधित अधिकारी कार्यालय में नहीं मिलते थे, जिससे भुगतान की प्रक्रिया अटकती रही।

थक-हारकर उन्होंने अपनी सुरक्षा के लिए दो वीडियो बनाए, जिनमें SDO एम.ए. खान जिला मुख्यालय के दफ्तर के बाहर कमीशन की राशि लेते नजर आ रहे हैं। वीडियो में कैलकुलेटर से 10 प्रतिशत की गणना और पूरी रकम चुकाने की बातचीत भी दिखाई दी है।

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