War Crisis: तनावग्रस्त हॉर्मुज स्ट्रेट से गुजरेंगे भारत के दो LPG टैंकर, वैश्विक सप्लाई पर असर
हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बीच भारत के दो LPG टैंकर रवाना होने की तैयारी में हैं। वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित, भारत ने सुरक्षित मार्ग की मांग की।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए एक अहम खबर सामने आई है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस मार्गों में से एक है, वहां से भारत के दो एलपीजी टैंकर जल्द ही गुजरने की तैयारी में हैं।
सूत्रों के अनुसार, भारतीय ध्वज वाले टैंकर “पाइन गैस” और “जग वसंत” फिलहाल संयुक्त अरब अमीरात के शारजाह के पास मौजूद हैं और उन्होंने अपने सिस्टम में यात्रा की तैयारी के संकेत देने शुरू कर दिए हैं। माना जा रहा है कि ये जहाज जल्द ही अपनी यात्रा शुरू कर सकते हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
हाल के दिनों में इस क्षेत्र में हालात काफी तनावपूर्ण बने हुए हैं। ईरान ने चेतावनी दी है कि वह खाड़ी क्षेत्र से बाहर जाने वाले जहाजों को निशाना बना सकता है। इसके चलते कई जहाजों ने अपनी आवाजाही रोक दी है और बड़ी संख्या में समुद्र में ही लंगर डालकर खड़े हैं।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया की करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस सप्लाई गुजरती है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की रुकावट का असर पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार पर पड़ता है। बीते 24 घंटों में इस मार्ग से कोई भी कच्चे तेल का टैंकर नहीं गुजरा, जिससे स्थिति की गंभीरता साफ नजर आती है।
भारत सरकार ने इस मामले में सतर्क रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वह क्षेत्र में मौजूद भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के पक्ष में है। साथ ही, प्रधानमंत्री स्तर पर भी अंतरराष्ट्रीय नेताओं से संपर्क बनाए रखा जा रहा है ताकि भारतीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
जानकारी के मुताबिक, “जग वसंत” टैंकर को भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने किराए पर लिया है, जबकि “पाइन गैस” इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) द्वारा संचालित किया जा रहा है।
हालांकि तनाव के बावजूद कुछ सीमित आवाजाही जारी है। हाल ही में एक पाकिस्तान जाने वाला तेल टैंकर इस मार्ग से सफलतापूर्वक गुजर चुका है। इसके अलावा, पिछले सप्ताह ईरान ने दो भारतीय टैंकरों को भी गुजरने की अनुमति दी थी।
अब सबकी नजर इन दो भारतीय टैंकरों पर टिकी है। यदि ये सुरक्षित रूप से अपनी यात्रा पूरी करते हैं, तो यह संकेत हो सकता है कि इस संवेदनशील समुद्री मार्ग से व्यापारिक गतिविधियां धीरे-धीरे फिर शुरू हो रही हैं।
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