रायगढ़ जिले के छिछोर-उमरिया टेल माइनर नहर निर्माण परियोजना के तहत करीब 10 साल पहले भूमि अधिग्रहण किया गया था, लेकिन अब तक उस भूमि पर परियोजना का काम शुरू नहीं हो सका

Feb 3, 2026 - 09:29
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रायगढ़ जिले के छिछोर-उमरिया टेल माइनर नहर निर्माण परियोजना के तहत करीब 10 साल पहले भूमि अधिग्रहण किया गया था, लेकिन अब तक उस भूमि पर परियोजना का काम शुरू नहीं हो सका

रायगढ़ जिले के छिछोर-उमरिया टेल माइनर नहर निर्माण परियोजना के तहत करीब 10 साल पहले भूमि अधिग्रहण किया गया था, लेकिन अब तक उस भूमि पर परियोजना का काम शुरू नहीं हो सका है। अब ग्राम टिनमिनी में भूमि अर्जन की प्रक्रिया तेज की गई है, जिसे लेकर ग्रामीण आपत्ति जता रहे हैं।

ऐसे में ग्रामीणों ने सोमवार को प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात कर अपनी समस्याएं रखीं। उन्होंने बताया कि अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) और भू-अर्जन अधिकारी ने धारा 21 के तहत नोटिस जारी किया है।

यह नोटिस भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013 के अंतर्गत जारी किया गया है। नोटिस जारी होने के बाद ग्रामीणों में मुआवजे को लेकर असंतोष देखा जा रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उन्हें उचित और न्यायसंगत मुआवजा नहीं मिलेगा, तब तक वे भूमि का कब्जा नहीं देंगे। इसके अलावा कई किसानों को भी मुआवजा नहीं मिल सका है।

ग्रामीणों के अनुसार नोटिस में उल्लेख किया गया है कि ग्राम टिनमिनी, पटवारी हल्का नंबर 34 में स्थित असिंचित भूमि का अर्जन प्रस्तावित है। यह भूमि छिछोर-उमरिया टेल माइनर नहर निर्माण परियोजना के लिए ली जा रही है।

2 फरवरी को प्रतिकर और संपत्ति संबंधी दावे की सुनवाई

भू-अर्जन प्रकरण के तहत संबंधित भूमिस्वामियों को सूचना दी गई है कि वे 2 फरवरी को स्वयं या अपने अभिकर्ता के माध्यम से न्यायालय में उपस्थित होकर भूमि पर अपना हक, माप, प्रतिकर और संपत्ति (वृक्ष, बोर आदि) से जुड़ा दावा प्रस्तुत करें।

नोटिस में यह भी स्पष्ट किया गया है कि तय तिथि पर यदि कोई दावा प्रस्तुत नहीं किया गया, तो यह माना जाएगा कि संबंधित पक्षों को न्यायालय में तय प्रतिकर पर कोई आपत्ति नहीं है। इस भूमि अर्जन को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बनी हुई है।

पुर्नवास को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं

ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें मुआवजे की राशि और पुनर्वास को लेकर अब तक कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। इसी कारण वे अपनी भूमि का कब्जा देने को तैयार नहीं हैं।

बताया जा रहा है कि एसडीएम की अनुपस्थिति में ग्रामीणों ने अपनी आपत्तियों को लेकर अपर कलेक्टर से मुलाकात की और पूरे मामले की जानकारी देते हुए उचित मुआवजा देने की मांग रखी।

कई किसानों को नहीं मिल सका है मुआवजा

गांव के अमन गुप्ता ने बताया कि यह परियोजना करीब 10 साल पुरानी है, लेकिन कई किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिल सका है। उन्होंने कहा कि पहले जिन जमीनों का अधिग्रहण हुआ था, वहां अब तक कोई काम नहीं हुआ और किसानों को उसका कोई लाभ नहीं मिला।

अब उसी परियोजना को लेकर फिर से नोटिस जारी किया गया है। इसी कारण सोमवार को ग्रामीण एसडीएम कार्यालय पहुंचे थे। ग्रामीणों की मांग है कि पहले अधिग्रहित भूमि पर काम शुरू किया जाए, उसके बाद ही नई भूमि का अर्जन किया जाए।

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