छात्रों को भी नोएडा मजदूरों की तरह निशाना बनाने की कोशिश: अभिजीत दिपके
CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सरकार पर छात्रों के खिलाफ कानून के दुरुपयोग का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि नोएडा के मजदूरों के साथ जो हुआ, अब छात्रों के साथ वैसा ही करने की कोशिश की जा रही है।
कॉकरेज जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक और संयोजक अभिजीत दिपके ने सरकार पर आंदोलन कर रहे छात्रों के खिलाफ कानून के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया है। दिपके ने कहा कि सरकार को उन लोगों के खिलाफ कानून का गलत इस्तेमाल बंद करना चाहिए, जो अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा रहे हैं।
उन्होंने नोएडा में मजदूरों के प्रदर्शन के बाद हुई कार्रवाई का जिक्र करते हुए कहा कि मजदूरों के साथ जो किया गया, अब छात्रों के साथ भी वैसा ही करने की कोशिश की जा रही है। दिपके ने इस कार्रवाई को स्वीकार नहीं करने की बात कही। उनके इस बयान के बाद छात्र आंदोलन और प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई को लेकर बहस फिर तेज हो गई है।
‘अपने अधिकारों के लिए लड़ने वालों के खिलाफ कानून का दुरुपयोग न हो’
अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए सरकार से सवाल किया कि प्रदर्शनकारियों और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले लोगों के खिलाफ कानून का इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को कानून का दुरुपयोग बंद करना चाहिए।
दिपके ने अपनी टिप्पणी में नोएडा के मजदूर आंदोलन का हवाला दिया। अप्रैल 2026 में नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र में मजदूरों ने वेतन और कामकाजी परिस्थितियों समेत विभिन्न मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन के बाद कई लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामले दर्ज हुए और गिरफ्तारियां हुईं। बाद में द इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच में कई जमानत आदेशों के आधार पर सवाल उठे कि कुछ आरोपियों के खिलाफ विशिष्ट भूमिका या पर्याप्त साक्ष्य नहीं पाए गए थे।
नोएडा मजदूर आंदोलन का क्यों दिया उदाहरण?
नोएडा में मजदूरों का आंदोलन अप्रैल में वेतन बढ़ाने और कामकाजी परिस्थितियों से जुड़े मुद्दों पर हुआ था। प्रदर्शन के दौरान हिंसा भी हुई, जिसके बाद पुलिस ने कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई की थी।
मामले की जांच के दौरान उत्तर प्रदेश के तत्कालीन श्रम मंत्री अनिल राजभर ने प्रदर्शन के पीछे एक बड़ी साजिश और संभावित ‘पाकिस्तान लिंक’ की जांच किए जाने की बात भी कही थी। बाद में सरकार ने न्यूनतम वेतन की दरों में बढ़ोतरी की घोषणा की।
अब अभिजीत दिपके ने इसी मामले का जिक्र करते हुए आशंका जताई है कि छात्र आंदोलनों में शामिल लोगों के खिलाफ भी इसी तरह कठोर कार्रवाई की जा सकती है।
छात्रों के आंदोलन को लेकर पहले भी उठा चुके हैं आवाज
अभिजीत दिपके पहले भी परीक्षा संबंधी कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के मुद्दे पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन में खुलकर बोलते रहे हैं। उन्होंने सरकार से प्रदर्शनकारियों को परेशान नहीं करने की अपील की थी और कहा था कि छात्रों को अपराधियों या आतंकवादियों की तरह नहीं देखा जाना चाहिए।
दिपके का कहना है कि छात्र देश का भविष्य हैं और उनकी समस्याओं तथा नाराजगी को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। उन्होंने पहले भी आरोप लगाया था कि कुछ राज्यों में प्रदर्शन में शामिल छात्रों के घरों तक पुलिस पहुंच रही है और उन्हें कार्रवाई की धमकी दी जा रही है। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया अलग-अलग मामलों में भिन्न रही है।
CJP का फोकस शिक्षा और बेरोजगारी के मुद्दों पर
कॉकरेज जनता पार्टी ने हाल के महीनों में शिक्षा, परीक्षा व्यवस्था और बेरोजगारी को अपने प्रमुख मुद्दों में शामिल किया है। अभिजीत दिपके ने कहा है कि संगठन देशभर में लोगों की समस्याओं को सुनेगा और युवाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाएगा।
CJP ने सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान भी शुरू किया है। दिपके ने कई सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाते हुए शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग की है। इसके अलावा संगठन ने सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और बेरोजगारी के मुद्दे को भी उठाने की बात कही है।
सरकार से कार्रवाई रोकने की मांग
दिपके के ताजा बयान का मुख्य संदेश यह है कि प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ कथित तौर पर कठोर या अनुचित कानूनी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अपने अधिकारों और समस्याओं को लेकर आवाज उठाने वाले लोगों के खिलाफ कानून के दुरुपयोग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
यह बयान ऐसे समय आया है जब छात्र आंदोलनों, परीक्षा व्यवस्था और युवाओं की समस्याओं को लेकर देश में लगातार राजनीतिक और सामाजिक बहस चल रही है।
निष्कर्ष
CJP के अभिजीत दिपके ने नोएडा मजदूर आंदोलन के बाद हुई कार्रवाई का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया है कि अब छात्रों के खिलाफ भी वैसी कार्रवाई करने की कोशिश हो रही है। उन्होंने सरकार से कानून का कथित दुरुपयोग बंद करने की मांग की है। वहीं, नोएडा मजदूर आंदोलन से जुड़े मामलों में पहले गिरफ्तारियां, गंभीर धाराओं में केस और बाद में कई आरोपियों को जमानत मिलने जैसे घटनाक्रम सामने आए थे। अब छात्रों के आंदोलनों को लेकर दिपके के बयान ने इस मुद्दे पर नई बहस छेड़ दी है।
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