छत्तीसगढ़ में विदेशी फंडिंग और कथित धर्मांतरण नेटवर्क पर जांच तेज, TTI कनेक्शन की पड़ताल
छत्तीसगढ़ में विदेशी फंडिंग और कथित धर्मांतरण नेटवर्क को लेकर जांच तेज हो गई है। प्रवर्तन निदेशालय सहित कई एजेंसियां TTI से जुड़े संभावित कनेक्शन और ग्रामीण इलाकों में गतिविधियों की पड़ताल कर रही हैं।
छत्तीसगढ़ में कथित धर्मांतरण, विदेशी फंडिंग और चर्च नेटवर्क को लेकर जांच एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं। हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में यह सामने आया कि विदेशी डेबिट कार्ड के माध्यम से देश में बड़ी मात्रा में पैसा लाया गया। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय मिशनरी संगठन “द टिमोथी इनिशिएटिव” (TTI) का नाम इस पूरे मामले में सामने आया है।
बताया जाता है कि TTI एक वैश्विक ईसाई मिशनरी संगठन है, जिसका उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में चर्च स्थापित करना है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या छत्तीसगढ़ में सक्रिय कुछ नेटवर्क इस संगठन के मॉडल से जुड़े हुए हैं।
किन इलाकों में जांच तेज?
जांच का दायरा बस्तर, धमतरी और राजनांदगांव जैसे जिलों तक फैलाया गया है। इन इलाकों में पहले से दर्ज कथित धर्मांतरण के मामलों और फंडिंग के स्रोतों को जोड़कर देखा जा रहा है। एजेंसियां स्थानीय स्तर पर सक्रिय पास्टर नेटवर्क, ट्रेनिंग प्रोग्राम और वित्तीय लेन-देन की कड़ियों को खंगाल रही हैं।
क्या है फंडिंग का मामला?
सूत्रों के मुताबिक, पिछले 6 महीनों में करीब 95 करोड़ रुपये की विदेशी फंडिंग राज्य में पहुंचने की बात सामने आई है। जांच इस दिशा में भी हो रही है कि यह पैसा किन माध्यमों से आया और इसका उपयोग किस तरह की गतिविधियों में किया गया।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज
इस मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि यह सिर्फ आर्थिक गड़बड़ी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा हो सकता है। वहीं कांग्रेस ने पलटवार करते हुए कहा है कि जिन लेन-देन की बात हो रही है, वे भाजपा शासन के दौरान हुए हैं।
आगे क्या?
जांच एजेंसियां अब फंडिंग ट्रेल, ट्रेनिंग मॉड्यूल और स्थानीय नेटवर्क के बीच संबंधों की गहराई से पड़ताल कर रही हैं। आने वाले समय में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे पूरे नेटवर्क की तस्वीर साफ हो सकती है।
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