चेन्नई के दूसरे एयरपोर्ट के लिए नए ठिकानों की तलाश, होसुर परियोजना पर भी जोर

तमिलनाडु सरकार ने परंदूर एयरपोर्ट परियोजना से आगे बढ़ते हुए चेन्नई के दूसरे एयरपोर्ट के लिए वैकल्पिक स्थानों की तलाश शुरू कर दी है। सरकार होसुर एयरपोर्ट परियोजना को भी आगे बढ़ाने के लिए प्रयास कर रही है।

Aug 24, 2026 - 11:21
 0  1
चेन्नई के दूसरे एयरपोर्ट के लिए नए ठिकानों की तलाश, होसुर परियोजना पर भी जोर

तमिलनाडु सरकार ने चेन्नई के दूसरे एयरपोर्ट को लेकर अपनी योजना में बड़ा बदलाव किया है। परंदूर में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजना को आगे नहीं बढ़ाने के बाद अब सरकार चेन्नई के दूसरे एयरपोर्ट के लिए वैकल्पिक स्थानों की तलाश कर रही है। साथ ही, सरकार होसुर में प्रस्तावित एयरपोर्ट परियोजना को भी आगे बढ़ाने को लेकर गंभीर है।

मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने 24 अगस्त को विधानसभा में बताया कि परंदूर परियोजना को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। सरकार का कहना है कि नए एयरपोर्ट के लिए ऐसा स्थान चुना जाना चाहिए, जहां कृषि भूमि और आवासीय क्षेत्रों पर कम से कम प्रभाव पड़े।

परंदूर में क्यों बदला फैसला?

चेन्नई के दूसरे एयरपोर्ट के लिए परंदूर को पहले प्रमुख स्थान के रूप में चुना गया था। हालांकि, इस परियोजना को स्थानीय किसानों और निवासियों के विरोध का सामना करना पड़ा। कृषि भूमि, जलाशयों और स्थानीय लोगों की आजीविका पर संभावित असर को लेकर लगातार आपत्तियां सामने आती रही थीं।

सरकार ने अब स्पष्ट किया है कि वह चेन्नई के लिए दूसरे एयरपोर्ट की जरूरत से पीछे नहीं हट रही है, लेकिन इसके लिए ऐसी जगह तलाशना चाहती है जहां किसानों और पर्यावरण पर कम असर पड़े।

नए स्थानों की तलाश शुरू

सरकार चेन्नई के दूसरे एयरपोर्ट के लिए कई संभावित विकल्पों पर विचार कर रही है। इनमें चेंगलपट्टू जिले में एक संभावित स्थान और मौजूदा मीनंबक्कम एयरपोर्ट के विस्तार जैसे विकल्प भी शामिल बताए जा रहे हैं।

हालांकि, नए स्थान पर एयरपोर्ट विकसित करने में समय लग सकता है। विशेषज्ञों और अधिकारियों के अनुसार, यदि पूरी तरह नए स्थान का चयन किया जाता है तो भूमि, पर्यावरणीय मंजूरी, तकनीकी अध्ययन और अन्य स्वीकृतियों के कारण परियोजना को पूरा होने में कई वर्ष लग सकते हैं।

होसुर एयरपोर्ट पर भी सरकार का जोर

तमिलनाडु सरकार चेन्नई के दूसरे एयरपोर्ट के साथ-साथ होसुर एयरपोर्ट परियोजना को भी आगे बढ़ाना चाहती है। होसुर कर्नाटक सीमा के करीब स्थित एक महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्र है और यहां एयरपोर्ट बनने से चेन्नई-बेंगलुरु औद्योगिक गलियारे को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।

होसुर एयरपोर्ट के लिए पहले कई संभावित स्थानों का अध्ययन किया जा चुका है। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण और तमिलनाडु औद्योगिक विकास निगम से जुड़े अधिकारियों ने भी संभावित स्थानों की व्यवहार्यता का अध्ययन किया था।

होसुर परियोजना में क्या है चुनौती?

होसुर एयरपोर्ट परियोजना के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक वायु क्षेत्र से जुड़ी मंजूरी है। प्रस्तावित स्थानों के आसपास रक्षा संबंधी वायु क्षेत्र और मौजूदा बेंगलुरु एयरपोर्ट से जुड़ी दूरी संबंधी पाबंदियां भी परियोजना को प्रभावित करती रही हैं।

राज्य सरकार का मानना है कि इन चुनौतियों का समाधान निकाला जा सकता है और होसुर में एयरपोर्ट विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।

चेन्नई को दूसरे एयरपोर्ट की जरूरत क्यों?

चेन्नई में यात्री और माल परिवहन की बढ़ती मांग को देखते हुए लंबे समय से दूसरे एयरपोर्ट की जरूरत महसूस की जा रही है। मौजूदा चेन्नई एयरपोर्ट पर यात्री संख्या और परिचालन दबाव बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री विजय ने विधानसभा में कहा कि औद्योगिक विकास, बढ़ती यात्री संख्या और माल परिवहन को देखते हुए चेन्नई के लिए नए एयरपोर्ट की जरूरत है। मौजूदा मीनंबक्कम एयरपोर्ट की क्षमता भी नए टर्मिनल के संचालन के बाद बढ़ने की उम्मीद है।

परंदूर परियोजना पर पहले हो चुका था बड़ा काम

परंदूर एयरपोर्ट परियोजना पर पिछली सरकार के दौरान काफी काम आगे बढ़ चुका था। परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण भी शुरू हुआ था और इसे केंद्र से साइट मंजूरी तथा सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी थी। प्रस्तावित परियोजना का अनुमानित खर्च करीब 27,400 करोड़ रुपये था।

अब राज्य सरकार के फैसले के बाद उस परियोजना का भविष्य बदल गया है और नए स्थान की तलाश पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

आगे क्या होगा?

अब तमिलनाडु सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऐसा स्थान चुनने की है, जहां एयरपोर्ट के लिए पर्याप्त जमीन उपलब्ध हो, पर्यावरणीय नुकसान कम हो और शहर से बेहतर संपर्क भी बनाया जा सके।

इसके साथ ही होसुर एयरपोर्ट के लिए केंद्र और रक्षा मंत्रालय से जुड़ी आवश्यक मंजूरियों को हासिल करना भी महत्वपूर्ण होगा।

निष्कर्ष

तमिलनाडु सरकार ने चेन्नई के दूसरे एयरपोर्ट की जरूरत को बरकरार रखते हुए परंदूर के विकल्प तलाशने का फैसला किया है। सरकार कृषि भूमि और स्थानीय आबादी पर कम प्रभाव वाले स्थान को प्राथमिकता देना चाहती है। दूसरी ओर, होसुर एयरपोर्ट परियोजना को भी आगे बढ़ाने की तैयारी है। आने वाले दिनों में नए स्थानों और दोनों परियोजनाओं को लेकर सरकार की विस्तृत योजना सामने आने की उम्मीद है।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0