अरुणदेव गौतम बने छत्तीसगढ़ के स्थायी DGP, 17 महीने बाद मिली पूर्णकालिक जिम्मेदारी
छत्तीसगढ़ सरकार ने आईपीएस अधिकारी अरुणदेव गौतम को राज्य का स्थायी डीजीपी नियुक्त किया है। सुप्रीम कोर्ट और UPSC की सख्ती के बाद 17 महीने बाद राज्य को पूर्णकालिक पुलिस प्रमुख मिला।
छत्तीसगढ़ को आखिरकार 17 महीने बाद पूर्णकालिक पुलिस महानिदेशक (DGP) मिल गया है। राज्य सरकार ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अरुणदेव गौतम के नाम पर मुहर लगाते हुए उन्हें स्थायी डीजीपी नियुक्त किया है। मुख्य सचिव कार्यालय की ओर से इस संबंध में आदेश जारी कर दिया गया है।
राज्य में लंबे समय से प्रभारी व्यवस्था के तहत पुलिस विभाग संचालित हो रहा था, जिसे लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सख्ती के बाद सरकार ने यह बड़ा फैसला लिया।
दरअसल, यूपीएससी ने राज्य सरकार से यह पूछा था कि अब तक राज्य में पूर्णकालिक डीजीपी की नियुक्ति क्यों नहीं की गई। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के 3 जुलाई 2018 के उस आदेश का हवाला दिया था, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया था कि किसी भी राज्य में केवल प्रभारी डीजीपी की व्यवस्था लंबे समय तक नहीं रखी जा सकती।
इसके बाद सरकार ने प्रक्रिया तेज की और यूपीएससी ने 13 मई 2025 को दो वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों का पैनल राज्य सरकार को भेजा। इस सूची में 1992 बैच के आईपीएस अरुणदेव गौतम और 1994 बैच के आईपीएस हिमांशु गुप्ता के नाम शामिल थे।
सूत्रों के अनुसार शुरुआत से ही अरुणदेव गौतम का नाम सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा था। प्रशासनिक अनुभव, वरिष्ठता और पुलिस विभाग में लंबे कार्यकाल को देखते हुए सरकार ने अंततः उन्हीं के नाम को मंजूरी दी।
अरुणदेव गौतम की नियुक्ति को राज्य पुलिस प्रशासन के लिए अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि उनके नेतृत्व में कानून व्यवस्था, नक्सल विरोधी अभियान और पुलिस सुधार से जुड़े मामलों में नई रणनीति देखने को मिल सकती है।
स्थायी डीजीपी की नियुक्ति के बाद पुलिस महकमे में लंबे समय से चल रही असमंजस की स्थिति भी खत्म हो गई है। वहीं राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में इस फैसले को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
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