रामलला सूर्य तिलक 2026: 9 मिनट तक माथे पर चमकी सूर्य किरणें, अयोध्या में 10 लाख श्रद्धालुओं की भीड़
अयोध्या में रामनवमी के अवसर पर रामलला का भव्य सूर्य तिलक हुआ, जिसमें 9 मिनट तक सूर्य की किरणें भगवान के ललाट पर पड़ीं। विशेष पूजा, 56 भोग और लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।
रामलला का दिव्य सूर्य तिलक किया गया, जो पूरे आयोजन का मुख्य आकर्षण रहा। करीब 9 मिनट तक सूर्य की किरणें भगवान राम के ललाट पर केंद्रित रहीं, जिसे देखने के लिए देशभर से श्रद्धालु पहुंचे।
यह आयोजन प्राण प्रतिष्ठा के बाद दूसरी बार किया गया सूर्य तिलक था, जिसे अत्याधुनिक तकनीक और पारंपरिक विधि के संयोजन से संपन्न कराया गया। मंदिर के गर्भगृह में इस दौरान विशेष पूजा-अर्चना हुई, जिसमें कई पुजारियों ने वैदिक मंत्रों के साथ अनुष्ठान किया।
सुबह की शुरुआत रामलला के अभिषेक से हुई, जिसमें पंचामृत का उपयोग किया गया। इसके बाद भगवान को स्वर्ण जड़ित पीतांबर पहनाया गया और श्रृंगार के बाद आरती की गई। जन्मोत्सव के अवसर पर भगवान को 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग अर्पित किया गया।
सूर्य तिलक की प्रक्रिया को सफल बनाने के लिए खास संरचना तैयार की गई थी। लगभग 65 फीट लंबे इस सिस्टम में अष्टधातु से बने पाइप, लेंस और दर्पण लगाए गए थे, जिनकी मदद से सूर्य की किरणों को सीधे गर्भगृह तक पहुंचाया गया।
इस खास मौके पर मंदिर परिसर को फूलों से सजाया गया था और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए दर्शन का समय भी बढ़ाया गया। जहां आम दिनों में सीमित समय के लिए दर्शन होते हैं, वहीं इस दिन भक्तों को सुबह से देर रात तक दर्शन का अवसर मिला।
रामनवमी के इस पावन अवसर पर अयोध्या में जबरदस्त जनसैलाब देखने को मिला। मंदिर ट्रस्ट के अनुसार, करीब 10 लाख श्रद्धालु रामलला के दर्शन के लिए पहुंचे। राम पथ, भक्ति पथ और जन्मभूमि मार्ग पर लंबी कतारें लगी रहीं, जिससे पूरे शहर में उत्सव जैसा माहौल बना रहा।
यह आयोजन न सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि आधुनिक तकनीक और सनातन परंपरा के अद्भुत संगम का भी उदाहरण प्रस्तुत करता है।
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