मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव, भारत की तेल और गैस सप्लाई पर असर की आशंका
ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत की खबरों के बाद मध्य पूर्व में तनाव बढ़ गया है। इससे भारत की तेल, LPG सप्लाई, महंगाई और व्यापार प्रभावित हो सकता है।
मध्य पूर्व में हालात तेजी से बदल रहे हैं। ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत की खबरों के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। अमेरिका और इजरायल से जुड़े हालातों के कारण दुनिया भर के बाजारों में चिंता का माहौल है। इसका असर भारत पर भी पड़ सकता है।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से तेल और गैस के रूप में मंगाता है। देश का करीब 35 से 50 प्रतिशत कच्चा तेल और बड़ी मात्रा में LPG व गैस होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होकर भारत पहुंचती है। अगर इस रास्ते में कोई रुकावट आती है, तो तेल और गैस की सप्लाई धीमी हो सकती है और दाम बढ़ सकते हैं।
भारत अपनी 80 से 85 प्रतिशत LPG जरूरतें खाड़ी देशों से आयात करता है। LPG का कोई बड़ा भंडार देश में मौजूद नहीं है, इसलिए सप्लाई रुकने पर सीधा असर आम लोगों की रसोई पर पड़ सकता है। गैस सिलेंडर महंगे हो सकते हैं।
अगर मध्य पूर्व में लंबे समय तक तनाव बना रहा, तो भारत के व्यापार पर भी असर पड़ सकता है। खाड़ी देशों में काम कर रहे करीब एक करोड़ भारतीय, जो गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल के देशों में रहते हैं, उनकी नौकरियों और भारत भेजे जाने वाले पैसों (रेमिटेंस) पर भी असर पड़ सकता है।
मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव भारत के लिए चिंता का विषय है। तेल, गैस, महंगाई और व्यापार—सब पर इसका असर पड़ सकता है। सरकार और विशेषज्ञ हालात पर नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि आने वाले दिन काफी अहम हो सकते हैं।
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