मणिपुर हिंसा: मृतकों की संख्या बढ़कर 5, इम्फाल घाटी में तनाव बरकरार

मणिपुर के इम्फाल घाटी में हिंसा के बाद मृतकों की संख्या 5 हो गई है। बिश्नुपुर में बच्चों की मौत के बाद भड़के विरोध प्रदर्शन के चलते कर्फ्यू और इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध लगाया गया है।

Apr 9, 2026 - 17:41
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मणिपुर हिंसा: मृतकों की संख्या बढ़कर 5, इम्फाल घाटी में तनाव बरकरार
बम हमले के बाद भड़की हिंसा, मणिपुर में 5 की मौत; 5 जिलों में कर्फ्यू और इंटरनेट पर पाबंदी

मणिपुर में एक बार फिर हिंसा भड़कने से हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। इम्फाल घाटी में हालिया घटनाओं के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 5 हो गई है। बुधवार को एक घायल प्रदर्शनकारी की मौत के बाद यह आंकड़ा बढ़ा।

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने इम्फाल ईस्ट, इम्फाल वेस्ट, थौबल, काकचिंग और बिश्नुपुर जिलों में कर्फ्यू लागू कर रखा है।
ब्रॉडबैंड इंटरनेट सेवाओं में आंशिक ढील दी गई है, लेकिन मोबाइल डेटा सेवाएं अब भी बंद हैं।

यह पूरा विवाद मंगलवार तड़के हुए एक बम हमले के बाद शुरू हुआ। बिश्नुपुर जिले के मोइरांग क्षेत्र में हुए इस हमले में 5 साल के एक बच्चे और 6 महीने की बच्ची की मौत हो गई, जबकि उनकी मां गंभीर रूप से घायल हो गईं।

इस घटना की खबर फैलते ही स्थानीय लोगों में गुस्सा फूट पड़ा।

गुस्साए लोगों ने विरोध प्रदर्शन के दौरान दो तेल टैंकर और एक ट्रक में आग लगा दी। इसके बाद भीड़ ने एक केंद्रीय सुरक्षा बल के कैंप पर हमला कर वहां खड़े वाहनों को भी जला दिया।

स्थिति बिगड़ने पर सुरक्षा बलों ने फायरिंग की, जिसमें पांच प्रदर्शनकारी घायल हुए। बाद में इनमें से दो की मौत हो गई।

यह सुरक्षा कैंप उस बफर जोन के पास स्थित है, जो 2023 में मेइती और कुकी समुदायों के बीच हुई हिंसा के बाद बनाया गया था।
बिश्नुपुर और चुराचांदपुर जिले के सीमावर्ती इलाकों में पहले से ही संवेदनशील स्थिति बनी हुई है।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बम हमले में शामिल होने के शक में तीन उग्रवादियों को गिरफ्तार किया गया है। मामले की जांच जारी है।

राज्य के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने कानून-व्यवस्था की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय बैठक बुलाई।
इस बैठक में गृह मंत्री, पुलिस महानिदेशक, सेना और अर्धसैनिक बलों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

तनाव के चलते इम्फाल घाटी में बाजार, स्कूल, कॉलेज और बैंक बंद रहे। सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा और लोग घरों में रहने को मजबूर हैं।

मणिपुर में ताजा हिंसा ने एक बार फिर राज्य की नाजुक स्थिति को उजागर किया है।
सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती हालात को जल्द सामान्य करना और लोगों का भरोसा बहाल करना है।

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