भारत माला परियोजना के तहत रायपुर–विशाखापट्नम हाईवे के लिए किए गए भूमि अधिग्रहण में बड़े मुआवजा घोटाले का खुलासा हुआ

Jan 1, 2026 - 09:24
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भारत माला परियोजना के तहत रायपुर–विशाखापट्नम हाईवे के लिए किए गए भूमि अधिग्रहण में बड़े मुआवजा घोटाले का खुलासा हुआ

भारत माला परियोजना के तहत रायपुर–विशाखापट्नम हाईवे के लिए किए गए भूमि अधिग्रहण में बड़े मुआवजा घोटाले का खुलासा हुआ है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 29 दिसंबर को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत रायपुर और महासमुंद में एक साथ 9 ठिकानों पर छापेमारी की।

इस कार्रवाई के दौरान एजेंसी ने करीब 40 लाख रुपए कैश, कई डिजिटल डिवाइस और बड़ी संख्या में आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए हैं। ऐसे में जांच एजेंसी ने कार्रवाई का दायरा बढ़ा दिया है। जांच में पाया गया कि बैकडेट में अफसरों ने जमीन का बटांकन (जमीन या संपत्ति का विभाजन) किया था।

यह कार्रवाई एसीबी/ईओडब्ल्यू रायपुर में दर्ज एफआईआर के आधार पर की गई है। इस एफआईआर में तत्कालीन एसडीओ (राजस्व) निर्भय साहू सहित कई अधिकारियों और निजी व्यक्तियों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और आईपीसी की अलग-अलग धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।

जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों ने सरकारी अधिकारियों से मिलीभगत कर भारत माला परियोजना के तहत अधिग्रहित भूमि के राजस्व अभिलेखों में हेरफेर किया और शासन से वास्तविक राशि से कहीं अधिक मुआवजा प्राप्त किया।

जमीन के कृत्रिम बंटवारे से खेला गया खेल

ED की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने साजिश के तहत जमीन के बड़े टुकड़ों को परिवार के सदस्यों के नाम पर छोटे-छोटे हिस्सों में बांटा। यह बंटवारा कागजों में पिछली तारीख दर्शाकर किया गया, ताकि यह दिखाया जा सके कि अधिग्रहण से पहले ही जमीन कई खातेदारों में बंटी हुई थी।

इस तरह मुआवजा नीति का फायदा उठाते हुए हर हिस्सेदार के नाम अलग-अलग मुआवजा स्वीकृत कराया गया और सरकारी खजाने से करोड़ों रुपए की राशि निकाली गई।

40 लाख कैश, डिजिटल सबूत और संपत्तियों की पहचान

तलाशी के दौरान ED को करीब 40 लाख रुपए कैश, मोबाइल, लैपटॉप, पेनड्राइव सहित कई डिजिटल डिवाइस और जमीन से जुड़े अहम दस्तावेज मिले हैं। इसके साथ ही एजेंसी ने अपराध की आय (POC) से खरीदी गई कई चल-अचल संपत्तियों की भी पहचान की है, जिन्हें जल्द अटैच किया जा सकता है।

ED अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और आने वाले दिनों में इस मुआवजा घोटाले में और बड़े नामों के सामने आने की संभावना है।

जांच के दायरे में सरकारी अधिकारी भी

ED के मुताबिक, भूमि अधिग्रहण के दौरान मुआवजा राशि के निर्धारण और भुगतान में गड़बड़ियों में कई लोगों के नाम शामिल हैं। जांच के दायरे में कुछ निजी व्यक्तियों, उनके सहयोगियों, सरकारी अधिकारियों और जमीन मालिकों के ठिकाने शामिल किए गए हैं।

ईडी की कार्रवाई हरमीत सिंह खनूजा, सहयोगी, कुछ सरकारी अधिकारी और भूमि अधिग्रहण से जुड़े जमीन मालिक शामिल हैं। बताया जा रहा है कि मुआवजा वितरण में नियमों के उल्लंघन और संदिग्ध लेन-देन को लेकर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

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