दुर्ग जिले में एक पारिवारिक विवाद ने खौफनाक रूप ले लिया, जहां एक भाई ने अपने ही छोटे भाई की हत्या कर दी

Feb 11, 2026 - 18:32
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दुर्ग जिले में एक पारिवारिक विवाद ने खौफनाक रूप ले लिया, जहां एक भाई ने अपने ही छोटे भाई की हत्या कर दी

दुर्ग जिले में एक पारिवारिक विवाद ने खौफनाक रूप ले लिया, जहां एक भाई ने अपने ही छोटे भाई की हत्या कर दी। इस मामले में लगभग ढाई साल चली सुनवाई के बाद सत्र न्यायाधीश दुर्ग की अदालत ने आरोपी दीपक राजपूत (30) को उम्रकैद की सजा सुनाई है। हत्या के बाद सबूत मिटाने के लिए शव को कपड़े और पत्थर से बांधकर डबरी में फेंक दिया गया था।

न्यायालय ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और 201 (सबूत मिटाना) के तहत दोषी ठहराया।

अभियोजन के अनुसार, यह घटना 17 सितंबर 2023 की रात लगभग 8:45 बजे हुई। बीना राजपूत जब काम से घर लौटी, तो उन्होंने अपने देवर सन्नी उर्फ नेपाली राजपूत को मृत अवस्था में पाया।

पूछताछ में उनके पति दीपक राजपूत ने स्वीकार किया कि दोनों भाइयों के बीच अक्सर छोटी-छोटी बातों पर विवाद होता था। घटना वाले दिन यह विवाद इतना बढ़ गया कि आरोपी ने लकड़ी की पटिया से सन्नी के सिर पर प्राणघातक वार कर दिया, जिससे उसकी मौत हो गई।

हत्या के बाद शव को डबरी में फेंका

हत्या के बाद, आरोपी ने शव को गमछा, नायलॉन और लाल कपड़े की रस्सी से बांधा। उसने शव के साथ पत्थर बांधकर उसे स्टेशन रोड मरोदा स्थित डबरी में फेंक दिया, ताकि सबूत मिटाए जा सके।

आरोपी ने अपनी पत्नी को भी जान से मारने की धमकी दी थी, जिसके डर से वह अपने मायके चली गई। अगले दिन, उन्होंने अपनी मां के साथ थाना नेवई पहुंचकर घटना की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने अपराध दर्ज कर जांच शुरू की।

मामले की सुनवाई सत्र न्यायाधीश के. विनोद कुजूर की अदालत में हुई। अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक श्रीमती लक्ष्मी साहू ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपी का अपराध सिद्ध किया।

न्यायालय ने पाया कि अभियुक्त ने सन्नी की हत्या जानबूझकर की और बाद में साक्ष्य मिटाने का प्रयास किया। कोर्ट ने इसे गंभीर और जघन्य अपराध मानते हुए कठोर दंड दिया।

क्या सजा सुनाई गई?

अदालत ने दीपक राजपूत को धारा 302 IPC (हत्या) के तहत उम्रकैद और 1,000 रुपए जुर्माना (जुर्माना न देने पर 6 माह अतिरिक्त सश्रम कारावास) धारा 201 IPC (साक्ष्य मिटाने का प्रयास) के तहत 5 वर्ष सश्रम कारावास एवं 1,000 रुपए जुर्माना (जुर्माना न देने पर 6 माह अतिरिक्त सश्रम कारावास) यह दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।

अदालत ने सजा वारंट तैयार कर आरोपी को केन्द्रीय कारागार दुर्ग भेजने का आदेश दिया।

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