दुर्ग जिले के नंदिनीनगर क्षेत्र में एक महिला से छेड़छाड़ और मारपीट के मामले में स्पेशल कोर्ट ने आरोपी परदेशी यादव को 6 साल कारावास की सजा सुनाई

Jan 29, 2026 - 18:22
 0  0
दुर्ग जिले के नंदिनीनगर क्षेत्र में एक महिला से छेड़छाड़ और मारपीट के मामले में स्पेशल कोर्ट ने आरोपी परदेशी यादव को 6 साल कारावास की सजा सुनाई

दुर्ग जिले के नंदिनीनगर क्षेत्र में एक महिला से छेड़छाड़ और मारपीट के मामले में स्पेशल कोर्ट ने आरोपी परदेशी यादव को 6 साल कारावास की सजा सुनाई है। हालांकि, न्यायालय ने आरोपी को अनुसूचित जाति व जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के आरोपों से बरी कर दिया।

यह घटना साल 2018 में ग्राम पिटौरा में हुई थी। 9 फरवरी 2018 की रात करीब साढ़े 9 बजे पीड़िता अपने घर के सामने बोरिंग पर बर्तन धो रही थी। उसी दौरान गांव का निवासी आरोपी परदेशी यादव वहां पहुंचा।

आरोपी ने महिला का हाथ पकड़कर उसे अंधेरे की ओर खींचने का प्रयास किया। पीड़िता के विरोध करने और चिल्लाने पर परदेशी यादव ने उसके साथ बेरहमी से मारपीट की।

उसने महिला के सिर और मुंह पर मुक्कों से हमला किया, जिससे उसका एक दांत टूट गया और दो दांत ढीले हो गए। घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया था।

घटना के बाद बदहवास हालत में पीड़िता घर पहुंची और अपने पति व परिजनों को पूरी घटना बताई। पीड़िता के पति, देवर और देवरानी ने कोर्ट में बयान दर्ज कराए, जिसमें उन्होंने बताया कि पीड़िता रोते-चिल्लाते हुए घर आई थी और आरोपी द्वारा किए गए कृत्य की जानकारी दी थी।

पीड़िता की रिपोर्ट पर नंदिनीनगर आरक्षी केंद्र में अपराध क्रमांक 38/2018 दर्ज किया गया। प्रारंभिक तौर पर भारतीय दंड संहिता की धारा 354 (छेड़छाड़) और 323 (मारपीट) के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू की गई।

जांच के दौरान पीड़िता का चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया, घटना स्थल का नक्शा तैयार किया गया और धारा 164 के तहत न्यायिक कथन दर्ज किए गए।

चोट की गंभीरता को देखते हुए बाद में धारा 325 जोड़ी गई। पीड़िता द्वारा जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए जाने के बाद यह मामला विशेष अनुसूचित जाति एवं जनजाति न्यायालय को स्थानांतरित कर दिया गया था।

कोर्ट में 8 गवाह, मेडिकल रिपोर्ट ने किया समर्थन मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 8 गवाह पेश किए, जिनमें पीड़िता, उसके परिजन, जांच अधिकारी और दो चिकित्सक शामिल थे।

डॉक्टरों ने मेडिकल रिपोर्ट के जरिए पुष्टि की कि पीड़िता को गंभीर चोटें आई थीं और दांत टूटना स्वेच्छया घोर उपहति की श्रेणी में आता है।

न्यायालय ने माना कि यौन उत्पीड़न के मामलों में पीड़िता का बयान अत्यंत महत्वपूर्ण होता है और केवल चश्मदीद गवाह न होने के आधार पर उसे खारिज नहीं किया जा सकता। SC-ST एक्ट के आरोप क्यों नहीं टिके? न्यायालय ने स्पष्ट किया कि केवल इस आधार पर कि पीड़िता अनुसूचित जाति से है, SC-ST एक्ट स्वतः लागू नहीं होता। अभियोजन पक्ष यह सिद्ध नहीं कर सका कि आरोपी ने जातिगत आधार पर अपराध किया। इसी कारण आरोपी को SC-ST एक्ट की धारा 3(1)(b)(1) से दोषमुक्त कर दिया गया। अंतिम फैसला: 6 साल की सश्रम कैद विशेष न्यायाधीश के. विनोद कुजूर ने आरोपी परदेशी यादव को धारा 354 IPC के तहत 3 वर्ष सश्रम कारावास व ₹1000 जुर्माना , धारा 325 IPC के तहत 3 वर्ष सश्रम कारावास व ₹1000 जुर्माना की सजा सुनाई। दोनों सजाएं अलग-अलग प्रभावी होंगी। यह फैसला 28 जनवरी 2026 को दुर्ग विशेष न्यायालय द्वारा सुनाया गया।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0