छत्तीसगढ़ की जेलों में एक साल में 66 बंदियों की मौत, 48 मामलों की जांच अधूरी; विधानसभा में सियासी संग्राम

छत्तीसगढ़ की केंद्रीय और जिला जेलों में एक साल में 66 बंदियों की मौत का मामला विधानसभा में गूंजा। 48 मामलों की जांच अब भी जारी, विपक्ष ने सरकार को घेरा।

Feb 27, 2026 - 10:43
 0  2
छत्तीसगढ़ की जेलों में एक साल में 66 बंदियों की मौत, 48 मामलों की जांच अधूरी; विधानसभा में सियासी संग्राम
राज्य की जेलों में कस्टोडियल डेथ पर बवाल: 66 मौतें, जांच की रफ्तार पर सवाल; विपक्ष का सदन से वाकआउट

छत्तीसगढ़ की जेलों में बंदियों की मौत का मुद्दा एक बार फिर सियासी बहस के केंद्र में आ गया है। विधानसभा के प्रश्नकाल के दौरान सामने आई जानकारी के अनुसार, जनवरी 2025 से 31 जनवरी 2026 के बीच राज्य की केंद्रीय और जिला जेलों में कुल 66 बंदियों की मौत हुई है। इस खुलासे के बाद सदन में तीखी बहस और नारेबाजी देखने को मिली।

उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने सदन को बताया कि इन 66 मामलों में से 18 प्रकरणों की न्यायिक मजिस्ट्रेट जांच पूरी हो चुकी है, जो राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत कराई गई। वहीं 48 मामलों की जांच अभी प्रक्रियाधीन है, जिस पर विपक्ष ने सवाल उठाए।

विपक्ष के सवाल, सदन में बढ़ा तनाव

प्रश्नकाल के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मृत बंदियों के नाम और संबंधित जेलों की जानकारी सदन में स्पष्ट रूप से नहीं दी गई। उन्होंने कवर्धा जेल में बंद रहे पंकज साहू और कांकेर जेल के जीवन ठाकुर के मामलों को उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा।

भूपेश बघेल ने दावा किया कि जीवन ठाकुर एक प्रमुख आदिवासी नेता थे और गंभीर बीमारी से पीड़ित होने के बावजूद उन्हें समय पर उचित इलाज नहीं मिला। उन्होंने यह भी कहा कि गिरफ्तारी के समय आदिवासी समाज ने इसका विरोध किया था।

सरकार का पक्ष

गृह मंत्री विजय शर्मा ने विपक्ष के आरोपों पर जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि पंकज साहू की मृत्यु निर्धारित समय-सीमा से पहले हुई थी, इसलिए वह इस आंकड़े में शामिल नहीं है। वहीं जीवन ठाकुर को न्यायालय की अनुमति से कांकेर से रायपुर लाया गया था, और उनकी मृत्यु उसी दौरान हुई, जिसे नियमानुसार दर्ज किया गया है।

हंगामा और वाकआउट

जैसे-जैसे बहस आगे बढ़ी, सदन का माहौल और गर्म होता गया। विपक्ष ने सरकार पर जेलों में स्वास्थ्य व्यवस्था और मानवाधिकारों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए वाकआउट कर दिया। इस दौरान सदन में नारेबाजी और हंगामे की स्थिति बन गई।

बड़ा सवाल

लगातार सामने आ रही जेल मौतों और लंबित जांचों ने राज्य की जेल व्यवस्था, बंदियों के इलाज और निगरानी प्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शेष 48 मामलों की जांच कब पूरी होगी और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0