अब स्लीपर कोच में भी मिलेगी बेडरोल सुविधा: दुर्ग-भोपाल अमरकंटक एक्सप्रेस से शुरुआत, ₹40 में चादर और ₹10 में तकिया

भारतीय रेलवे ने स्लीपर क्लास यात्रियों के लिए बेडरोल सुविधा शुरू की है। इसकी शुरुआत दुर्ग-भोपाल अमरकंटक एक्सप्रेस से हुई है। यात्री ₹40 में चादर, ₹10 में तकिया और ₹70 में पूरा बेडरोल सेट किराये पर ले सकेंगे।

Jul 17, 2026 - 12:35
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अब स्लीपर कोच में भी मिलेगी बेडरोल सुविधा: दुर्ग-भोपाल अमरकंटक एक्सप्रेस से शुरुआत, ₹40 में चादर और ₹10 में तकिया
भारतीय रेलवे की स्लीपर कोच के अंदर का साफ-सुथरा दृश्य। एक रेलवे कर्मचारी यात्री को पैक किया हुआ बेडरोल (चादर, तकिया और कंबल) देते हुए दिखाई दे। पृष्ठभूमि में स्लीपर बर्थ और ट्रेन का स्वच्छ इंटीरियर हो। किसी प्रकार का टेक्स्ट न हो। यथार्थवादी न्यूज़ फोटोग्राफी शैली, 16:9 अनुपात।

भारतीय रेलवे ने स्लीपर क्लास में यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए नई सुविधा शुरू की है। अब लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों को घर से चादर या तकिया ले जाने की जरूरत नहीं होगी। रेलवे ने स्लीपर कोच में भी किराये पर बेडरोल उपलब्ध कराने की शुरुआत कर दी है।

इस सुविधा का उद्देश्य यात्रियों को अधिक आरामदायक सफर उपलब्ध कराना और यात्रा के दौरान होने वाली असुविधा को कम करना है।

दुर्ग-भोपाल अमरकंटक एक्सप्रेस से शुरुआत

रेलवे ने इस सुविधा की शुरुआत दुर्ग-भोपाल अमरकंटक एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 12853/12854) से की है। यदि यह व्यवस्था सफल रहती है, तो भविष्य में इसे अन्य ट्रेनों में भी लागू किया जा सकता है।

कितना देना होगा किराया?

रेलवे द्वारा तय किए गए किराए के अनुसार—

  • चादर: ₹40
  • तकिया: ₹10
  • पूरा बेडरोल सेट (चादर, तकिया आदि): ₹70

यात्री अपनी आवश्यकता के अनुसार केवल चादर, केवल तकिया या पूरा बेडरोल सेट किराये पर ले सकते हैं।

कैसे मिलेगी सुविधा?

स्लीपर कोच में यात्रा कर रहे यात्रियों के पीएनआर और बर्थ नंबर का सत्यापन करने के बाद रेलवे कर्मचारी उन्हें बेडरोल उपलब्ध कराएंगे।

इस व्यवस्था से यात्रियों को सफर के दौरान आसानी से साफ-सुथरा बेडरोल मिल सकेगा।

यात्रियों को होगा फायदा

नई व्यवस्था से—

  • लंबी दूरी के यात्रियों को आरामदायक यात्रा मिलेगी।
  • घर से अतिरिक्त सामान ले जाने की जरूरत कम होगी।
  • जरूरत के अनुसार कम खर्च में बेडरोल उपलब्ध होगा।
  • यात्रा के दौरान सुविधा और स्वच्छता दोनों बेहतर होंगी।

रेलवे को भी होगा लाभ

रेलवे का मानना है कि पे-पर-यूज (Pay Per Use) मॉडल से बेडशीट और कंबल की चोरी जैसी घटनाओं में कमी आ सकती है। इससे रेलवे को होने वाले आर्थिक नुकसान को भी कम करने में मदद मिलेगी।

रेलवे आने वाले समय में यात्रियों की प्रतिक्रिया के आधार पर इस सुविधा का दायरा अन्य ट्रेनों तक बढ़ाने पर भी विचार कर सकता है।

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