3 दिन में माफी मांगें जुकरबर्ग’, संसदीय समिति की Meta को चेतावनी; सेफ हार्बर सुरक्षा पर भी सवाल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो फेसबुक से हटाए जाने के मामले में संसदीय समिति ने Meta के CEO मार्क जुकरबर्ग से 3 दिन के भीतर बिना शर्त माफी मांगने को कहा है। समिति ने चेतावनी दी है कि ऐसा नहीं होने पर कंपनी की ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा पर कार्रवाई की सिफारिश की जा सकती है।

Aug 5, 2026 - 17:10
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3 दिन में माफी मांगें जुकरबर्ग’, संसदीय समिति की Meta को चेतावनी; सेफ हार्बर सुरक्षा पर भी सवाल

‘3 दिन में माफी मांगें जुकरबर्ग’, संसदीय समिति की Meta को चेतावनी; सेफ हार्बर सुरक्षा पर भी खतरा

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक वीडियो को फेसबुक से अस्थायी रूप से हटाए जाने के विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। संसद की संचार और सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति ने Meta के CEO मार्क जुकरबर्ग से तीन दिन के भीतर बिना शर्त माफी मांगने को कहा है। समिति ने चेतावनी दी है कि ऐसा नहीं होने पर कंपनी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की सिफारिश की जा सकती है।

क्या है पूरा मामला?

विवाद उस समय शुरू हुआ जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो फेसबुक प्लेटफॉर्म से कुछ समय के लिए हट गया था। इस घटना पर सरकार और संसदीय समिति ने Meta से जवाब मांगा। बाद में कंपनी की ओर से तकनीकी कारणों का हवाला दिया गया और खेद भी व्यक्त किया गया, लेकिन समिति ने इसे पर्याप्त नहीं माना।

जुकरबर्ग से व्यक्तिगत माफी की मांग

समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने कहा कि केवल कंपनी की ओर से स्पष्टीकरण पर्याप्त नहीं है। समिति चाहती है कि Meta प्रमुख मार्क जुकरबर्ग स्वयं इस मामले में सार्वजनिक और बिना शर्त माफी दें।

क्या है ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा?

‘सेफ हार्बर’ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की वह कानूनी सुरक्षा है, जिसके तहत सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म अपने उपयोगकर्ताओं द्वारा पोस्ट की गई सामग्री के लिए सीधे जिम्मेदार नहीं ठहराए जाते। समिति ने संकेत दिया है कि यदि Meta संतोषजनक जवाब नहीं देता है, तो इस सुरक्षा को वापस लेने की सिफारिश की जा सकती है।

Meta अधिकारियों की हुई बैठक

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Meta के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस मामले को लेकर सरकारी प्रतिनिधियों और संसदीय समिति के साथ बैठक भी की है। बैठक में वीडियो हटाए जाने के कारणों और प्लेटफॉर्म की नीतियों पर चर्चा हुई।

बढ़ सकता है विवाद

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मामला आगे बढ़ता है तो सोशल मीडिया कंपनियों और सरकार के बीच जवाबदेही तथा कंटेंट मॉडरेशन को लेकर नई बहस शुरू हो सकती है। वहीं राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

आगे क्या?

अब सभी की नजर Meta और मार्क जुकरबर्ग की प्रतिक्रिया पर है। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर जवाब या माफी नहीं आती है, तो संसदीय समिति आगे की कार्रवाई पर विचार कर सकती है। इस घटनाक्रम को भारत में डिजिटल प्लेटफॉर्म नियमन से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में से एक माना जा रहा है।

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