रायपुर बुलडोजर कार्रवाई: खेत बेचकर बनाया 50 लाख का घर टूटा, PM आवास भी नहीं बचा, उजड़े परिवारों की दर्दभरी कहानी

रायपुर के नकटी गांव में बुलडोजर कार्रवाई के बाद कई परिवार बेघर हो गए। किसी का 50 लाख का मकान टूटा तो किसी का PM आवास, वहीं परीक्षा की तैयारी कर रहे बच्चों की किताबें भी मलबे में दब गईं।

Jun 30, 2026 - 18:42
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रायपुर बुलडोजर कार्रवाई: खेत बेचकर बनाया 50 लाख का घर टूटा, PM आवास भी नहीं बचा, उजड़े परिवारों की दर्दभरी कहानी
बुलडोजर के बाद बिखरे कई सपने: 50 लाख का घर ढहा, PM आवास टूटा, मलबे में दबी बच्चों की किताबें

रायपुर के माना थाना क्षेत्र के नकटी गांव में प्रशासन की बुलडोजर कार्रवाई ने कई परिवारों की जिंदगी बदल दी। जिन मकानों में वर्षों से लोग रह रहे थे, वे कुछ ही घंटों में मलबे में तब्दील हो गए। इस कार्रवाई के बाद कई परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं और अपने भविष्य को लेकर चिंता जता रहे हैं।

सबसे मार्मिक कहानी उस परिवार की है जिसने अपना खेत बेचकर करीब 50 लाख रुपये की लागत से घर बनाया था। परिवार का कहना है कि वर्षों की मेहनत और जमा-पूंजी से तैयार किया गया आशियाना कुछ ही समय में ढहा दिया गया। अब उनके सामने दोबारा जीवन की शुरुआत करने की चुनौती खड़ी है।

कार्रवाई से प्रभावित परिवारों में ऐसे लोग भी शामिल हैं जिनके मकान प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनाए गए थे। उनका कहना है कि सरकारी योजना के तहत मिला घर भी बुलडोजर की जद में आ गया, जिससे उनके मन में कई सवाल खड़े हो गए हैं।

इस कार्रवाई का असर बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ा। परीक्षा की तैयारी कर रहे कुछ विद्यार्थियों की किताबें, कॉपियां और जरूरी दस्तावेज मलबे में दब गए। कई परिवारों ने बताया कि बच्चों के शैक्षणिक प्रमाणपत्र और अन्य जरूरी सामान भी समय पर नहीं निकाला जा सका।

कई बुजुर्ग और महिलाएं अपने टूटे घरों के सामने खड़े होकर वर्षों की यादों को बिखरते हुए देखती रहीं। कुछ परिवारों ने बताया कि उनके पास रहने के लिए फिलहाल कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है, जबकि रोजमर्रा का जरूरी सामान भी मलबे में दब गया।

दूसरी ओर प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई सरकारी भूमि को खाली कराने और प्रस्तावित विकास परियोजना के लिए की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार प्रभावित लोगों को पहले नोटिस जारी किया गया था और नियमानुसार प्रक्रिया अपनाई गई है।

फिलहाल क्षेत्र में स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। प्रभावित परिवार राहत, पुनर्वास और अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं, जबकि प्रशासन कानून के तहत आगे की कार्रवाई जारी रखने की बात कह रहा है।

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