रामनवमी पर बंगाल में सियासी संग्राम: 5 दिन चलेंगे जुलूस, BJP उठाएगी हिंदू सुरक्षा का मुद्दा, TMC बोली- राम सबके हैं
पश्चिम बंगाल में रामनवमी को लेकर सियासत तेज हो गई है। BJP जहां हिंदुओं पर अत्याचार का मुद्दा उठाने की तैयारी में है, वहीं TMC भी कार्यक्रमों के जरिए जवाब देने में जुटी है। राज्य में हजारों जुलूस निकलने की संभावना है।
पश्चिम बंगाल में रामनवमी इस बार केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सियासी माहौल का अहम हिस्सा बनती नजर आ रही है। राज्य में 27 मार्च को रामनवमी मनाई जाएगी, लेकिन खासतौर पर आसनसोल समेत कई इलाकों में कार्यक्रम कई दिनों तक चलने वाले हैं।
5 दिन तक चलेंगे कार्यक्रम
भारतीय जनता पार्टी और विभिन्न हिंदू संगठनों ने इस बार रामनवमी को बड़े स्तर पर मनाने की योजना बनाई है। बताया जा रहा है कि अलग-अलग क्षेत्रों में लगभग पांच दिनों तक शोभा यात्राएं और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें हजारों लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।
BJP का फोकस हिंदू मुद्दों पर
BJP इस मौके पर हिंदुओं की सुरक्षा और कथित अत्याचारों के मुद्दे को प्रमुखता से उठाने की तैयारी में है। पार्टी नेताओं का कहना है कि वे बंगाल ही नहीं, बल्कि पड़ोसी देशों में हिंदुओं के खिलाफ हो रही घटनाओं को भी जनता के सामने रखेंगे।
TMC भी एक्टिव, ‘राम सबके’ का संदेश
दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस भी पीछे नहीं है। पार्टी ने साफ किया है कि भगवान राम किसी एक दल के नहीं हैं। इसी संदेश के साथ TMC ‘अस्त्रहीन संकीर्तन रैली’ जैसे कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी कर रही है, ताकि धार्मिक आयोजन को शांतिपूर्ण तरीके से किया जा सके।
आसनसोल बना केंद्र
आसनसोल इस बार खास फोकस में है, क्योंकि यहां पहले भी रामनवमी के दौरान तनाव और हिंसा की घटनाएं हो चुकी हैं। प्रशासन इस बार विशेष सतर्कता बरत रहा है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।
चुनावी माहौल में बढ़ी अहमियत
राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए रामनवमी का महत्व और बढ़ गया है। राजनीतिक दल इसे अपने-अपने तरीके से जनता तक पहुंचने का अवसर मान रहे हैं। अनुमान है कि पूरे राज्य में हजारों की संख्या में जुलूस और रैलियां आयोजित की जाएंगी।
लंबे समय से हो रही परंपरा
बंगाल में पिछले कई वर्षों से रामनवमी के मौके पर हिंदू संगठनों द्वारा रैलियां निकाली जाती रही हैं। अब इन आयोजनों में राजनीतिक दलों की भागीदारी भी बढ़ती जा रही है, हालांकि अधिकतर जुलूसों में पार्टी के झंडों का उपयोग नहीं किया जाता।
रामनवमी इस बार पश्चिम बंगाल में धार्मिक आस्था के साथ-साथ राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का भी मंच बन गई है। BJP और TMC दोनों ही इसे अपने-अपने एजेंडे के साथ जोड़कर जनता के बीच पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे आने वाले चुनावों पर इसका असर देखने को मिल सकता है।
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