डर से विकास तक का सफर: बड़ेसेट्टी गांव को घोषित किया गया नक्सल-मुक्त
छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले का बड़ेसेट्टी गांव, जहां कभी डर और गोलियों की गूंज थी, अब नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त घोषित किया गया है। प्रशासन और सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई के बाद गांव में शांति लौटी है और सरकार ने विकास के लिए विशेष आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।
छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में स्थित बड़ेसेट्टी गांव ने इतिहास रचते हुए खुद को नक्सलवाद के साए से बाहर निकाल लिया है। यह गांव अब आधिकारिक रूप से छत्तीसगढ़ का पहला नक्सल-मुक्त गांव घोषित किया गया है। वर्षों तक यह इलाका नक्सलियों की गतिविधियों, हथियारों की आवाज और भय के माहौल के लिए जाना जाता था।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, एक समय ऐसा था जब गांव में बाहरी लोगों का आना लगभग नामुमकिन था। रात होते ही डर का माहौल छा जाता था और आम जीवन बुरी तरह प्रभावित रहता था। लेकिन बीते कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों की मजबूत मौजूदगी, प्रशासन की रणनीति और ग्रामीणों के सहयोग से हालात धीरे-धीरे बदलने लगे।
सरकार द्वारा चलाए गए नक्सल-विरोधी अभियानों के साथ-साथ विकास योजनाओं को भी गांव तक पहुंचाया गया। सड़क, बिजली, पानी और संचार जैसी बुनियादी सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया गया, जिससे ग्रामीणों का भरोसा प्रशासन पर बढ़ा। नक्सलियों का प्रभाव कमजोर पड़ता गया और आखिरकार गांव पूरी तरह उनके कब्जे से मुक्त हो गया।
नक्सल-मुक्त घोषित किए जाने के बाद सरकार ने बड़ेसेट्टी के लिए विशेष विकास पैकेज देने का ऐलान किया है। इसका उद्देश्य गांव को आत्मनिर्भर बनाना, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करना तथा युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना है।
प्रशासन का कहना है कि बड़ेसेट्टी की सफलता आने वाले समय में अन्य नक्सल-प्रभावित इलाकों के लिए एक मॉडल उदाहरण बनेगी। वहीं ग्रामीणों में भी अब भविष्य को लेकर नया उत्साह और भरोसा दिखाई दे रहा है।
यह बदलाव केवल सुरक्षा की जीत नहीं, बल्कि उस भरोसे की जीत है जो सरकार और आम लोगों के बीच दोबारा कायम हुआ है।
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