छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: रिटायर्ड IAS निरंजन दास को सुप्रीम कोर्ट से जमानत, 30 करोड़ कमीशन लेने का आरोप

छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाले में रिटायर्ड IAS निरंजन दास को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली। उन पर आबकारी नीति में हेरफेर कर 30 करोड़ से ज्यादा कमीशन लेने और सिंडिकेट चलाने का आरोप है।

May 26, 2026 - 11:28
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छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: रिटायर्ड IAS निरंजन दास को सुप्रीम कोर्ट से जमानत, 30 करोड़ कमीशन लेने का आरोप
3200 करोड़ शराब घोटाले में निरंजन दास को बेल, कोर्ट ने राज्य से बाहर रहने की रखी शर्त

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले मामले में रिटायर्ड IAS अधिकारी निरंजन दास को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई है। कोर्ट ने उन्हें सशर्त जमानत देते हुए निर्देश दिया है कि वे फिलहाल छत्तीसगढ़ राज्य से बाहर रहेंगे और केवल जांच या कोर्ट में पेशी के दौरान ही राज्य में प्रवेश कर सकेंगे।

निरंजन दास पूर्व आबकारी आयुक्त रह चुके हैं और जांच एजेंसियों के मुताबिक वे कथित शराब सिंडिकेट के प्रमुख चेहरों में शामिल थे। उन पर आरोप है कि उन्होंने आबकारी नीति तैयार करने से लेकर शराब कारोबार से जुड़े प्रशासनिक फैसलों तक में अहम भूमिका निभाई।

30 करोड़ रुपए से ज्यादा कमीशन लेने का आरोप

EOW की जांच में दावा किया गया है कि निरंजन दास ने कथित सिंडिकेट के जरिए शराब कारोबार में कई फैसले प्रभावित किए। किस जिले में कौन अधिकारी तैनात होगा, किस ब्रांड की शराब बिकेगी और सप्लाई का नेटवर्क कैसे चलेगा, इन सभी मामलों में उनकी भूमिका बताई गई है।

जांच एजेंसियों के अनुसार, इन फैसलों के बदले उन्हें 30 करोड़ रुपए से अधिक का फायदा मिला। एजेंसियों का यह भी कहना है कि उन्होंने आईटीएस अधिकारी एपी त्रिपाठी के साथ मिलकर करीब तीन साल तक पूरे सिस्टम को नियंत्रित किया।

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुई सुनवाई

सोमवार को चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने मामले की सुनवाई की। कोर्ट में बताया गया कि निरंजन दास पर आबकारी नीति को कुछ खास कारोबारी समूहों के पक्ष में तैयार करने के आरोप हैं।

हालांकि, अदालत ने यह भी माना कि मामले के कई अन्य आरोपी पहले ही जमानत पर बाहर हैं और ट्रायल पूरा होने में लंबा समय लग सकता है। इसी आधार पर कोर्ट ने निरंजन दास को भी राहत दी।

8 महीने पहले हुई थी गिरफ्तारी

निरंजन दास को 18 सितंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था। जांच एजेंसियों ने उन पर आर्थिक अपराध और भ्रष्टाचार से जुड़े गंभीर आरोप लगाए थे। गिरफ्तारी के बाद वे न्यायिक हिरासत में थे।

अब सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें उन्हीं शर्तों पर जमानत दी है, जो इस मामले के अन्य आरोपियों पर लागू हैं। कोर्ट ने साफ किया कि वे गवाहों या जांच को प्रभावित नहीं करेंगे।

पहले भी कई आरोपी पा चुके हैं जमानत

इससे पहले शराब घोटाला, कोल लेवी और DMF मामलों में कई बड़े नामों को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है। इनमें रिटायर्ड IAS अनिल टुटेजा, निलंबित IAS रानू साहू, समीर विश्नोई, पूर्व मंत्री कवासी लखमा, सौम्या चौरसिया और कारोबारी सूर्यकांत तिवारी समेत अन्य आरोपी शामिल हैं।

इन सभी को राज्य से बाहर रहने जैसी शर्तों के साथ राहत दी गई है।

क्या है पूरा शराब घोटाला?

ED और EOW की जांच के मुताबिक छत्तीसगढ़ में करीब 3200 करोड़ रुपए का शराब घोटाला हुआ। आरोप है कि तत्कालीन सरकार के कार्यकाल में अफसरों, कारोबारियों और विभागीय अधिकारियों के गठजोड़ ने अवैध तरीके से शराब कारोबार को नियंत्रित किया।

जांच एजेंसियों का दावा है कि डिस्टलरी संचालकों से प्रति पेटी कमीशन लिया जाता था। इसके अलावा नकली होलोग्राम लगाकर सरकारी दुकानों में शराब बेची गई। आरोप यह भी है कि इस पूरे नेटवर्क में कई अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत थी।

15 जिलों में फैला था नेटवर्क

जांच में सामने आया कि प्रदेश के करीब 15 जिलों को शराब खपाने के लिए चिन्हित किया गया था। कथित सिंडिकेट सप्लाई एरिया तय कर अवैध वसूली करता था और शराब की कीमतों में हेरफेर के जरिए भारी कमाई की जाती थी।

एजेंसियों के मुताबिक, तीन वित्तीय वर्षों के दौरान डिस्टलरी संचालकों से करोड़ों रुपए का कमीशन वसूला गया। मामले में अभी भी ट्रायल जारी है और जांच एजेंसियां कई पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं।

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