छत्तीसगढ़ विधानसभा में स्काउट-गाइड जंबूरी टेंडर विवाद पर हंगामा, विपक्ष ने उठाए पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के सवाल
छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में स्काउट-गाइड जंबूरी आयोजन के टेंडर निरस्तीकरण को लेकर विवाद बढ़ गया। कांग्रेस विधायक उमेश पटेल ने टेंडर प्रक्रिया और अध्यक्ष पद को लेकर सवाल उठाए, जबकि स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने नियमों के तहत कार्रवाई होने की बात कही। जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने जांच की मांग करते हुए सदन से वॉकआउट किया।
रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में स्काउट-गाइड जंबूरी आयोजन से जुड़े टेंडर को रद्द किए जाने का मामला जोरदार तरीके से उठा। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।
कांग्रेस विधायक Umesh Patel ने सरकार से सवाल करते हुए पूछा कि पहले जारी टेंडर को आखिर किस वजह से रद्द किया गया। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि टेंडर की शर्तों में बदलाव या उसे डाउनग्रेड करने के लिए क्या स्काउट-गाइड संगठन से अनुमति ली गई थी। साथ ही उन्होंने पूरे मामले में पारदर्शिता की मांग की।
सदन में चर्चा के दौरान स्काउट-गाइड राज्य परिषद के अध्यक्ष पद को लेकर भी भ्रम की स्थिति का मुद्दा सामने आया। विपक्ष ने कहा कि अलग-अलग लोग स्वयं को अध्यक्ष बता रहे हैं, जिससे संगठन के नेतृत्व को लेकर स्पष्टता नहीं है।
इस पर जवाब देते हुए स्कूल शिक्षा मंत्री Gajendra Yadav ने कहा कि स्काउट-गाइड राज्य परिषद में शिक्षा मंत्री पदेन अध्यक्ष होते हैं और मुख्यमंत्री संगठन के संरक्षक की भूमिका निभाते हैं। उन्होंने बताया कि पूर्व मंत्री Brijmohan Agrawal के पद छोड़ने के बाद उनके सभी अधिकार स्वतः समाप्त हो गए थे और वर्तमान व्यवस्था नियमों के अनुसार ही संचालित हो रही है।
मंत्री ने यह भी कहा कि टेंडर प्रक्रिया में किसी तरह की अनियमितता या भ्रष्टाचार नहीं हुआ है, इसलिए जांच की आवश्यकता नहीं है। हालांकि विपक्ष मंत्री के जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ और पूरे मामले की जांच कराने की मांग करते हुए सदन से बहिर्गमन कर दिया।
इस मुद्दे के कारण बजट सत्र के दौरान विधानसभा में कुछ समय के लिए माहौल गरमाया रहा और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए।
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