छत्तीसगढ़ के बीजापुर में 52 माओवादी सरेंडर — 49 पर कुल ₹1.41 करोड़ इनाम; पुनर्वासन नीति से लौटे मुख्यधारा में
छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में गुरुवार को 52 माओवादी कैडरों ने सुरक्षा बलों के समक्ष हथियार छोड़े। इनमें से 49 पर कुल ₹1.41 करोड़ का इनाम घोषित था। 21 महिलाएं भी शामिल हैं और सभी को पुनर्वास नीति के तहत सहायता दी जाएगी। जानिए इस बड़े घटनाक्रम की पूरी खबर।
बीजापुर (छत्तीसगढ़) — छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में गुरुवार को 52 माओवादी (Maoists) ने सुरक्षा बलों के सामने हथियार डालकर आत्मसमर्पण कर दिया। इस बड़ी कार्रवाई को पुलिस और केंद्रीय आरक्षी बलों के सामने किया गया, जिसमें 21 महिलाएं भी शामिल हैं।
पुलिस के अनुसार, 49 माओवादी कैडरों पर कुल मिला कर ₹1.41 करोड़ से अधिक का इनाम घोषित था, जो इस आत्मसमर्पण की व्यापकता को दर्शाता है।
आत्मसमर्पण के प्रमुख तथ्य
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आत्मसमर्पण करने वाले कई माओवादी दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमिटी (DKSZC), आंध्र–ओडिशा बॉर्डर डिवीजन और भमरागढ़ एरिया कमिटी से जुड़े थे।
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इनमें कुछ बड़े और मिड-लेवल कमांडर भी शामिल हैं जिनके सिर पर उच्च रकम का इनाम था।
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आत्मसमर्पण के बाद पुलिस अधिकारियों ने उन्हें तत्काल वित्तीय सहायता के रूप में ₹50,000 प्रति व्यक्ति दी और आगे की पुनर्वास (rehabilitation) प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
पुना मार्गेम (Poona Margem) अभियान
पुलिस ने बताया कि यह आत्मसमर्पण “पुना मार्गेम” अभियान, जो सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति का हिस्सा है, के तहत हुआ है। इस योजना के तहत माओवादी कैडरों को मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रोत्साहन और सहायता दी जाती है।
बीजापुर के SP जितेंद्र यादव ने कहा कि आत्मसमर्पण कर रहे माओवादी को संविधान और लोकतांत्रिक तरीके से जीवन जीने का अवसर मिला है और उन्होंने हमले, IED विस्फोट, सुरक्षा बलों पर ambush और वसूली जैसे मामलों में अपनी भागीदारी खत्म कर दी है।
बस्तर में बड़ी सफलताएं
इस आत्मसमर्पण का सिलसिला अन्य बस्तर जिलों में हो रहे सरेंडरों से भी जुड़ा हुआ है। बीजापुर, सुकमा और दंतेवाड़ा समेत कई जिलों में पिछले कुछ दिनों में अनेक माओवादी हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटे हैं, जो पिछले वर्षों में जारी लक्ष्य-आधारित नो लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिज़्म (LWE) खत्म करने की दिशा में केंद्रीय और राज्य सरकार की प्रयासों का हिस्सा है।
सरकार व सुरक्षा बलों की प्रतिक्रिया
पुलिस और CRPF की संयुक्त टीमों ने कहा है कि यह आत्मसमर्पण न सिर्फ संगठन के लिए मनोवैज्ञानिक रूप से बड़ा झटका है, बल्कि बस्तर क्षेत्र में नक्सलियों की पकड़ कमजोर होने का संकेत भी है। आत्मसमर्पण करने वाले कई कैडर ने हिंसात्मक रास्ता छोड़कर सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन का विकल्प चुना है, जो सरकार की नीतियों की सफलता को दर्शाता है।
बीजापुर जिले में 52 माओवादी का सामूहिक आत्मसमर्पण सुरक्षा बलों और प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इससे क्षेत्र में शांति स्थापना के प्रयासों को बल मिला है और बस्तर के अस्थिर इलाकों में कानून-व्यवस्था की स्थिति में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
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