अजित पवार विमान क्रैश: 28 दिनों की देरी के कारण मिस हुआ सैटेलाइट-आधारित सुरक्षा सिस्टम

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के विमान हादसे के शुरुआती विश्लेषण में पता चला है कि विमान को सैटेलाइट आधारित नेविगेशन और लैंडिंग सुरक्षा सिस्टम (GAGAN) से लैस होना चाहिए था, लेकिन वह सिर्फ 28 दिनों की देरी के कारण इसका लाभ नहीं ले सका, जिससे लेंडिंग में मदद मिल सकती थी। खबर पढ़ें।

Jan 29, 2026 - 12:10
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अजित पवार विमान क्रैश: 28 दिनों की देरी के कारण मिस हुआ सैटेलाइट-आधारित सुरक्षा सिस्टम
अजित पवार के विमान में सुरक्षा उपकरण सिर्फ 28 दिनों से चूक? बारामती क्रैश में सिस्टम न होने से उठे सवाल

नई दिल्ली / मुंबई, 29 जनवरी (समाचार एजेंसी) — महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के विमान हादसे से जुड़ा प्रारंभिक विश्लेषण यह संकेत देता है कि उनका विमान सैटेलाइट आधारित सुरक्षा एवं नेविगेशन सिस्टम (जैसे GAGAN) से लगभग केवल 28 दिनों की देरी से चूक गया था, जिसके कारण वह उच्च स्तर के नेविगेशन सहायता का लाभ नहीं ले सका। यह उपकरण कम दृश्यता वाली परिस्थितियों में लैंडिंग को अधिक सुरक्षित और आसान बनाता है।

बुधवार की सुबह बारामती एयरपोर्ट, पुणे (महाराष्ट्र) में एक लीयरजेट-45 विमान क्रैश हो गया, जिसमें उपमुख्यमंत्री अजित पवार समेत कुल पाँच लोग की मृत्यु हो गई। विमान रनवे के करीब लगभग 100 मीटर के भीतर दुर्घटनाग्रस्त हो गया और उसमें आग लग गई। 

प्रारंभिक जांच के अनुसार, हादसे वाला विमान लगभग 16 वर्ष पुराना था और 2 जून, 2021 को भारत में रजिस्टर हुआ था। सिर्फ 28 दिनों बाद ही एक नियामक आदेश लागू हुआ था, जिसके तहत नए पंजीकृत विमान में सैटेलाइट सहायता आधारित नेविगेशन और अप्रोच सिस्टम (GAGAN) को आवश्यक किया गया था। लेकिन यह विमान निर्धारित समय से पहले रजिस्टर होने के कारण उस अनिवार्य तकनीक से लैस नहीं था।

इस प्रकार विमान कानूनी रूप से तो ठीक माना जाता था, लेकिन तकनीकी रूप से उसमें वह उन्नत गाइडेंस प्रणाली मौजूद नहीं थी जो कम विजिबिलिटी के दौरान पायलटों को रनवे की सटीक स्थिति और मार्गदर्शन देने में मदद करती। 

बारामती एयरपोर्ट के माहौल में सुबह के समय धुंध और कम दृश्यता मौजूद थी। विमान की अप्रोच के दौरान पहली बार रनवे स्पष्ट नहीं दिखा तो पायलट ने गो-अराउंड किया यानी पुनः ऊँचाई पकड़कर दूसरा प्रयास किया। लेकिन दूसरे लैंडिंग प्रयास में विमान दुर्घटनाग्रस्त होकर रनवे से बाहर गिर गया और उसमें आग लग गई। 

अब नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और संबंधित प्राधिकरण ब्लैक बॉक्स और अन्य तकनीकी डेटा के आधार पर शुरुआती जांच जारी रखे हुए हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि क्या तकनीकी कारण थे या मानवीय चूक के कारण यह हादसा हुआ।

यह दुर्घटना न केवल महाराष्ट्र में बल्कि पूरे देश में एविएशन सुरक्षा मानकों और उन्नत तकनीकी अनुपालन पर नई बहस को जन्म दे रही है।

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