IIT कानपुर में 25 वर्षीय PhD स्कॉलर ने आत्महत्या की — 3 हफ्तों में दूसरा मामला, छात्र मानसिक तनाव से जूझ रहा था
आईआईटी कानपुर के 25 साल के PhD शोध छात्र रामस्वरूप ईशराम ने आत्महत्या कर ली। छात्र ने कैंपस की 6वीं मंजिल से कूदकर खुदखुशी की, और यह 3 हफ्तों के भीतर संस्थान में दूसरा ऐसा मामला है। prelim जांच में पता चला कि वह एंग्जायटी/डिप्रेशन से जूझ रहा था। संस्थान प्रशासन ने घटना पर दुख जताया है और जांच जारी है।
कानपुर (उत्तर प्रदेश) — भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान IIT कानपुर के कैंपस में मंगलवार को एक दर्दनाक घटना हुई, जब 25 वर्षीय PhD शोध छात्र ने आत्महत्या कर ली। मृतक छात्र रामस्वरूप ईशराम थे, जो अर्थ साइंसेज विभाग में डॉक्टरेट कर रहे थे और अपने परिवार — पत्नी मंजू तथा 2 वर्ष की बेटी के साथ कैंपस के नया SBRA भवन में रह रहे थे।
पुलिस और संस्थान सूत्रों के अनुसार, रामस्वरूप ने **कैंपस की रिहायशी इमारत की छठी मंजिल से कूदकर अपनी जान दे दी। उन्हें तत्काल निजी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। प्रारंभिक जांच से पता चला है कि वह लंबे समय से डिप्रेशन और एंग्जायटी जैसी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे और कई बार काउंसलिंग ले चुके थे। बिस्तर के पास या आसपास कोई आत्महत्या नोट नहीं मिला है।
स्थानीय पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और घटना की गहराई से जांच जारी है। पुलिस अधिकारी SM क़ासिम अबीदी के अनुसार, रामस्वरूप की मानसिक स्वास्थ्य स्थिति और तनाव के कारण यह कदम उठाने की संभावना जताई जा रही है।
यह घटना लगभग 3 हफ्तों के अंदर IIT कानपुर में दूसरी आत्महत्या है, जिससे छात्र मानसिक स्वास्थ्य और सहायता प्रणालियों पर गंभीर चिंताएँ बढ़ गई हैं। इससे पहले दिसंबर 2025 में एक BTech छात्र ने कैंपस में खुदखुशी की थी, और यह कैंपस में छात्र आत्महत्या का एक चिंताजनक सिलसिला बनता जा रहा है।
IIT कानपुर के निदेशक मनीन्द्र अग्रवाल ने इस दर्दनाक घटना पर गहरा दुख जताया है और मृतक के परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएँ प्रकट की हैं। उन्होंने कहा कि संस्थान ने एक “उत्कृष्ट शोधकर्ता” को खो दिया है और इस क्षण में परिवार को शक्ति देने की प्रार्थना करता है।
इस तरह की घटनाओं ने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन और संस्थागत सहायता तंत्र पर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि उच्च शिक्षा और शोध कार्यक्रमों में समय पर मानसिक समर्थन, काउंसलिंग और खुला संवाद बेहद आवश्यक हैं ताकि ऐसे दुखद परिणामों को रोका जा सके।
आईआईटी कानपुर में 25 वर्षीय PhD छात्र की आत्महत्या ने उच्च शिक्षा संस्थानों में छात्र मानसिक स्वास्थ्य की चुनौतियों पर गंभीर चेतावनी दी है। संस्थान में यह 3 हफ्तों के भीतर दूसरी आत्महत्या है, और इससे मानसिक स्वास्थ्य समर्थन प्रणाली मजबूती की व्यापक मांग तेज हो रही है।
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