AIADMK में बड़ी टूट: शणमुगम गुट ने विजय की TVK सरकार को दिया समर्थन
तमिलनाडु में AIADMK दो गुटों में बंटती नजर आ रही है। सीवी शणमुगम के नेतृत्व वाला गुट अभिनेता-राजनेता विजय की TVK सरकार के समर्थन में आ गया है। जानिए इस राजनीतिक संकट की वजह और आगे क्या असर पड़ सकता है।
तमिलनाडु की राजनीति में विधानसभा चुनाव के बाद बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। विपक्षी दल AIADMK के भीतर मतभेद अब खुलकर सामने आने लगे हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता सीवी शणमुगम ने अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी TVK को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है। बताया जा रहा है कि उनके साथ कई विधायक भी सरकार के समर्थन में खड़े हो गए हैं।
मंगलवार को मीडिया से बातचीत में शणमुगम ने कहा कि जनता ने इस बार विजय के नेतृत्व पर भरोसा जताया है और लोकतांत्रिक जनादेश का सम्मान करना जरूरी है। उन्होंने साफ कहा कि उनकी प्राथमिकता AIADMK की पहचान को बचाए रखना है और DMK के साथ किसी तरह की राजनीतिक साझेदारी पार्टी के लिए नुकसानदायक साबित होती।
हालांकि शणमुगम ने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य पार्टी को तोड़ना नहीं है। उन्होंने एडप्पादी पलानीसामी को अब भी अपना नेता बताया, लेकिन संकेत दिए कि पार्टी के भीतर रणनीति और नेतृत्व को लेकर गंभीर असहमति मौजूद है।
2026 विधानसभा चुनाव में AIADMK का प्रदर्शन उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा। पार्टी सीमित सीटों पर सिमट गई, जिसके बाद अंदरूनी नाराजगी बढ़ती गई। चुनाव परिणाम आने के बाद कई नेताओं ने संगठन की दिशा और नेतृत्व शैली पर सवाल उठाने शुरू कर दिए थे।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि AIADMK के संकट की सबसे बड़ी वजह लगातार चुनावी हार और नेतृत्व को लेकर बढ़ती असंतुष्टि है। पिछले कुछ वर्षों में पार्टी लोकसभा चुनाव, विधानसभा चुनाव और उपचुनावों में कमजोर प्रदर्शन करती रही है। इससे कार्यकर्ताओं और विधायकों के बीच भरोसा कम हुआ।
पार्टी के भीतर यह चर्चा भी तेज है कि भाजपा के साथ रिश्तों को संभालने में भी नेतृत्व विफल रहा। कुछ नेताओं का आरोप है कि सीट बंटवारे और चुनावी रणनीति के कारण सहयोगी दलों के साथ तालमेल कमजोर हुआ, जिसका असर चुनावी नतीजों पर पड़ा।
इधर विजय के नेतृत्व वाली TVK सरकार राज्य की राजनीति में नए दौर की शुरुआत मानी जा रही है। करीब छह दशक बाद तमिलनाडु में ऐसी स्थिति बनी है, जब सत्ता DMK और AIADMK से बाहर किसी तीसरे राजनीतिक दल के हाथ में गई है। इससे राज्य की पारंपरिक द्रविड़ राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।
विजय ने हाल ही में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है और उन्हें विधानसभा में बहुमत साबित करना है। ऐसे समय में AIADMK के बागी नेताओं का समर्थन उनकी सरकार को और मजबूत कर सकता है। वहीं AIADMK के लिए यह संकट संगठनात्मक अस्तित्व की चुनौती बनता जा रहा है।
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