रायपुर लेंसकार्ट शोरूम विवाद: कर्मचारियों को जबरन तिलक लगाने का VIDEO वायरल, कंपनी ने दी सफाई

रायपुर के लेंसकार्ट शोरूम में धार्मिक संगठन के कार्यकर्ताओं द्वारा कर्मचारियों को तिलक लगाने का वीडियो वायरल। विवाद के बाद कंपनी ने सफाई देते हुए नई गाइडलाइन जारी की।

Apr 22, 2026 - 11:59
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रायपुर लेंसकार्ट शोरूम विवाद: कर्मचारियों को जबरन तिलक लगाने का VIDEO वायरल, कंपनी ने दी सफाई
रायपुर में लेंसकार्ट शोरूम में घुसकर कर्मचारियों को लगाया तिलक, वीडियो वायरल; कंपनी ने बदली पॉलिसी

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक लेंसकार्ट शोरूम से जुड़ा विवाद सामने आया है, जहां कथित तौर पर एक धार्मिक संगठन के कार्यकर्ताओं ने दुकान में घुसकर कर्मचारियों को तिलक लगाया। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

मिली जानकारी के अनुसार, कुछ लोग शोरूम में पहुंचे और कर्मचारियों से उनके नाम पूछे। इसके बाद उन्होंने कर्मचारियों को तिलक लगाया और कहा कि वे इसे लगाकर काम करें तथा अपनी धार्मिक पहचान जाहिर करें। इस दौरान ‘जय श्री राम’ के नारे भी लगाए गए।

वीडियो में एक महिला यह भी कहती नजर आती है कि अगर अन्य धर्म के लोग अपनी परंपराओं का पालन कर सकते हैं, तो हिंदुओं को भी अपने प्रतीकों के साथ काम करना चाहिए।

वीडियो में दिख रही महिला ने दावा किया कि वह पहले इसी शोरूम से चश्मा खरीद चुकी है और दूसरों को भी इसकी सिफारिश करती रही है। लेकिन अब कंपनी पर लगाए गए आरोपों के चलते वह इसका बहिष्कार कर रही है और चश्मा तोड़ने की बात कहती है।

यह मामला तब बढ़ा जब सोशल मीडिया पर कंपनी की कथित ‘ग्रूमिंग पॉलिसी’ का एक पुराना दस्तावेज वायरल हुआ। इसमें दावा किया गया कि कर्मचारियों को तिलक या अन्य धार्मिक प्रतीक पहनने से रोका जाता है, जबकि कुछ अन्य धार्मिक पहनावे की अनुमति है।

इसी को लेकर विरोध तेज हुआ और कंपनी के खिलाफ बहिष्कार की मांग उठने लगी।

विवाद बढ़ने के बाद कंपनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया दी। कंपनी ने कहा कि वायरल डॉक्यूमेंट पुराना है और वर्तमान नीति का प्रतिनिधित्व नहीं करता।

नई गाइडलाइन के अनुसार अब कर्मचारियों को तिलक, बिंदी, सिंदूर, कलावा, कड़ा, हिजाब और पगड़ी जैसे सभी धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीक पहनने की अनुमति होगी। कंपनी ने यह भी कहा कि यदि किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो उसे खेद है।

कंपनी के फाउंडर पीयूष बंसल ने भी इस मुद्दे पर सफाई दी। उन्होंने कहा कि कंपनी किसी भी धार्मिक अभिव्यक्ति पर रोक नहीं लगाती और यह पूरा विवाद एक पुराने दस्तावेज के कारण पैदा हुआ भ्रम है।

कॉर्पोरेट कंपनियां अपने कर्मचारियों के पहनावे और व्यवहार को लेकर कुछ नियम तय करती हैं, जिन्हें ‘ग्रूमिंग पॉलिसी’ कहा जाता है। इसका मकसद ब्रांड की एकरूपता बनाए रखना होता है, लेकिन भारत जैसे विविधता वाले देश में इसमें सभी धर्मों और परंपराओं का सम्मान जरूरी माना जाता है।

रायपुर की इस घटना ने एक बार फिर कार्यस्थल पर धार्मिक स्वतंत्रता और कॉर्पोरेट नीतियों के संतुलन को लेकर बहस छेड़ दी है। फिलहाल कंपनी ने अपनी पॉलिसी स्पष्ट कर स्थिति को संभालने की कोशिश की है, लेकिन सोशल मीडिया पर यह मुद्दा अब भी चर्चा में बना हुआ है।

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