राजनांदगांव में 150 एकड़ की अवैध प्लॉटिंग पर चला बुलडोजर, भू-माफियाओं के खिलाफ प्रशासन की बड़ी कार्रवाई
छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में प्रशासन ने भू-माफियाओं के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 150 एकड़ से अधिक की अवैध प्लॉटिंग पर बुलडोजर चलाया। मनगट्टा, बघेरा और झुराडबरी क्षेत्र में अवैध कॉलोनियों की सड़कें, गेट और बाउंड्री वॉल तोड़ी गईं।
राजनांदगांव में भू-माफियाओं पर प्रशासन का शिकंजा, 150 एकड़ से अधिक की अवैध प्लॉटिंग ध्वस्त
छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में प्रशासन ने अवैध प्लॉटिंग और भू-माफियाओं के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 150 एकड़ से अधिक क्षेत्र में विकसित की जा रही अनधिकृत कॉलोनियों को ध्वस्त कर दिया। जिले में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में शामिल इस अभियान के दौरान बुलडोजर चलाकर कई अवैध निर्माणों को हटाया गया।
मनगट्टा और आसपास के क्षेत्रों में चला अभियान
प्रशासनिक कार्रवाई मनगट्टा वन चेतना केंद्र के समीप स्थित बघेरा और झुराडबरी क्षेत्र में की गई। अधिकारियों को सूचना मिली थी कि कृषि भूमि को नियमों के विपरीत छोटे-छोटे प्लॉट में विभाजित कर बेचा जा रहा है। जांच में कई अनियमितताएं सामने आने के बाद राजस्व विभाग, नगर एवं ग्राम निवेश विभाग तथा अन्य संबंधित एजेंसियों की संयुक्त टीम ने कार्रवाई की।
सड़कें, गेट और बाउंड्री वॉल तोड़ी गईं
कार्रवाई के दौरान अवैध कॉलोनियों में विकसित की गई आंतरिक सड़कों, मुख्य प्रवेश द्वारों और बाउंड्री वॉल को मशीनों की मदद से हटाया गया। प्रशासन का कहना है कि संबंधित परियोजनाओं के लिए आवश्यक वैधानिक अनुमति नहीं ली गई थी और भूमि उपयोग संबंधी नियमों का भी पालन नहीं किया गया था।
नियमों के उल्लंघन पर सख्त रुख
अधिकारियों के अनुसार, कई स्थानों पर कृषि भूमि का डायवर्शन कराए बिना उसे आवासीय कॉलोनी के रूप में विकसित किया जा रहा था। साथ ही नियमानुसार आवश्यक स्वीकृतियां और पंजीकरण भी नहीं कराए गए थे। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी ऐसे मामलों पर लगातार निगरानी रखी जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।
जमीन खरीदने से पहले बरतें सावधानी
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी प्लॉट या जमीन में निवेश करने से पहले दस्तावेजों की पूरी जांच करना बेहद जरूरी है। खरीदारों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भूमि का उपयोग किस श्रेणी में दर्ज है और उस पर निर्माण की वैधानिक अनुमति उपलब्ध है या नहीं।
इसके अलावा कॉलोनी का ले-आउट संबंधित विभाग से स्वीकृत होना चाहिए तथा आवश्यक होने पर रेरा पंजीकरण की भी जांच करनी चाहिए। जमीन पर किसी प्रकार का सरकारी दावा, विवाद या अतिक्रमण तो नहीं है, इसकी पुष्टि भी जरूरी है। सभी दस्तावेजों की जांच के बाद ही रजिस्ट्री और नामांतरण की प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए।
अवैध कॉलोनियों पर जारी रहेगा अभियान
जिला प्रशासन ने साफ संकेत दिए हैं कि अवैध प्लॉटिंग और नियमों के विरुद्ध विकसित की जा रही कॉलोनियों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। अधिकारियों का मानना है कि ऐसी कार्रवाइयों से न केवल भू-माफियाओं पर अंकुश लगेगा, बल्कि आम नागरिकों को भी अवैध परियोजनाओं में निवेश करने से बचाया जा सकेगा।
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