पीओके में ‘गंभीर पुलिस बर्बरता’ की भारत ने निंदा की, पाकिस्तान को ठहराया जवाबदेह
भारत ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई और मानवाधिकार उल्लंघनों पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि वहां के लोगों के साथ हो रहे दमन और पुलिस बर्बरता के लिए पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए तथा उनकी सुरक्षा और अधिकारों का सम्मान सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
भारत ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में कथित रूप से प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की गई पुलिस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि क्षेत्र में लोगों के साथ किए जा रहे व्यवहार को लेकर गंभीर चिंताएं हैं और वहां के निवासियों के मूलभूत अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने अपने बयान में कहा कि पीओके में सामने आई घटनाएं चिंताजनक हैं और वहां के लोगों को शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने का अधिकार मिलना चाहिए। भारत ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग और दमनात्मक कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों तथा मानवाधिकारों के विपरीत है।
भारत ने कहा कि पीओके के लोगों को लंबे समय से राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। सरकार का मानना है कि वहां की जनता की शिकायतों और मांगों का समाधान बल प्रयोग के बजाय संवाद और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के माध्यम से किया जाना चाहिए।
नई दिल्ली ने पाकिस्तान से आग्रह किया कि वह क्षेत्र में मानवाधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करे और पुलिस कार्रवाई से जुड़े मामलों में जवाबदेही तय करे। भारत ने कहा कि किसी भी प्रकार के अत्यधिक बल प्रयोग या मानवाधिकार उल्लंघन की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
भारत ने यह भी दोहराया कि जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से जुड़े उसके रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। भारतीय पक्ष का कहना है कि क्षेत्र में रहने वाले लोगों की सुरक्षा, सम्मान और अधिकार सर्वोच्च महत्व के विषय हैं।
इस मुद्दे पर भारत की प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब पीओके में प्रशासनिक नीतियों, महंगाई, संसाधनों के वितरण और अन्य स्थानीय मुद्दों को लेकर समय-समय पर विरोध प्रदर्शन देखने को मिले हैं। हाल की घटनाओं ने एक बार फिर वहां की स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित किया है।
भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी आग्रह किया कि वह क्षेत्र में मानवाधिकारों और नागरिक स्वतंत्रताओं की स्थिति पर ध्यान दे तथा यह सुनिश्चित करने के प्रयासों का समर्थन करे कि लोगों की आवाज को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से सुना जाए।
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