छत्तीसगढ़ विधानसभा में वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने इकोनॉमिक सर्वे पेश किया

रायपुर में छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया। सर्वे में 2025-26 में GSDP 6.31 लाख करोड़ पहुंचने और मजबूत आर्थिक वृद्धि का अनुमान जताया गया।

Feb 23, 2026 - 17:14
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छत्तीसगढ़ विधानसभा में वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने इकोनॉमिक सर्वे पेश किया
छत्तीसगढ़ विधानसभा में वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने पेश किया आर्थिक सर्वेक्षण, GSDP में 11.57% बढ़ोतरी का अनुमान

रायपुर में छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र की शुरुआत राज्य की अर्थव्यवस्था से जुड़े अहम दस्तावेज के साथ हुई। पहले ही दिन वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने सदन में आर्थिक सर्वेक्षण प्रस्तुत किया, जिसमें राज्य के आर्थिक भविष्य को लेकर सकारात्मक संकेत दिए गए।

आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) में 11.57 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाया गया है। सरकार का आकलन है कि राज्य की अर्थव्यवस्था बढ़कर 6.31 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।

विकास योजनाओं का असर

वित्त मंत्री ने सर्वेक्षण पेश करते हुए कहा कि यह अनुमान सरकार की विकासोन्मुख नीतियों, अधोसंरचना परियोजनाओं के विस्तार और निवेश में आई तेजी का नतीजा है। उन्होंने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 में राज्य ने 10.50 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की थी, जो राष्ट्रीय औसत से बेहतर मानी जा रही है।

कृषि और निवेश से मिली मजबूती

ओपी चौधरी के अनुसार, धान खरीदी व्यवस्था को मजबूत करने, कृषि आधारित उद्योगों के विस्तार और सेवा क्षेत्र में निवेश बढ़ने से राज्य की अर्थव्यवस्था को स्थिर गति मिली है। इन क्षेत्रों में हुए प्रयासों का सकारात्मक प्रभाव रोजगार और आय दोनों पर दिखाई दे रहा है।

प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोतरी

आर्थिक सर्वेक्षण में यह भी सामने आया है कि वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ की प्रति व्यक्ति आय बढ़कर 1,79,244 रुपये होने का अनुमान है। यह पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। सरकार का कहना है कि कल्याणकारी योजनाओं, ग्रामीण विकास कार्यक्रमों और रोजगार सृजन की पहल से आम लोगों की आमदनी में सुधार हुआ है।

बजट से जुड़ी उम्मीदें

आर्थिक सर्वेक्षण को आगामी बजट की दिशा तय करने वाला अहम दस्तावेज माना जा रहा है। प्रस्तुत आंकड़े यह संकेत देते हैं कि सरकार विकास के साथ-साथ वित्तीय संतुलन पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है। अब 24 फरवरी को पेश होने वाले बजट को लेकर राजनीतिक दलों और जनता की निगाहें टिकी हुई हैं, जहां इन अनुमानों को अमल में लाने की रणनीति सामने आएगी

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