अफीम खेती मामले में नया मोड़: शिकायत करने वाला सरपंच बर्खास्त, चुनावी हलफनामे में केस छिपाने का आरोप साबित

दुर्ग जिले के समोदा गांव में अफीम की खेती उजागर करने वाले सरपंच अरुण गौतम को SDM कोर्ट ने पद से हटा दिया है। कोर्ट ने चुनावी हलफनामे में आपराधिक मामला छिपाने को नियमों का उल्लंघन माना। अब गांव में दोबारा सरपंच चुनाव होगा।

May 7, 2026 - 15:28
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अफीम खेती मामले में नया मोड़: शिकायत करने वाला सरपंच बर्खास्त, चुनावी हलफनामे में केस छिपाने का आरोप साबित
दुर्ग के समोदा गांव में उपचुनाव तय, हत्या के प्रयास का मामला छिपाने पर SDM कोर्ट ने सरपंच का चुनाव किया निरस्त

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में सामने आए चर्चित अफीम खेती मामले ने अब नया राजनीतिक और कानूनी मोड़ ले लिया है। जिस सरपंच ने गांव में अवैध अफीम की खेती का खुलासा करते हुए शिकायत दर्ज कराई थी, अब उसी को कोर्ट के आदेश पर पद से हटा दिया गया है।

समोदा गांव के सरपंच अरुण गौतम को एसडीएम कोर्ट ने चुनावी हलफनामे में गंभीर आपराधिक मामला छिपाने का दोषी मानते हुए अयोग्य घोषित कर दिया है। कोर्ट के फैसले के बाद उनका चुनाव निरस्त कर दिया गया और गांव का सरपंच पद रिक्त घोषित कर दिया गया है। अब यहां दोबारा उपचुनाव कराया जाएगा।

मामला उस समय चर्चा में आया था जब होली के बाद समोदा गांव में अफीम की खेती का खुलासा हुआ था। शिकायत के आधार पर पुलिस ने भाजपा नेता विनायक ताम्रकार को गिरफ्तार किया था। प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर खेत में लगी अफीम की फसल नष्ट कर दी थी। इस कार्रवाई के बाद मामला पूरे प्रदेश में सुर्खियों में आ गया था।

बताया जा रहा है कि सरपंच अरुण गौतम और विनायक ताम्रकार के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। अफीम खेती की शिकायत के बाद दोनों पक्षों के बीच तनाव और बढ़ गया था। इसी दौरान अरुण गौतम के खिलाफ चुनावी दस्तावेजों में जानकारी छिपाने की शिकायत भी सामने आई।

पंचायत चुनाव में दूसरे स्थान पर रहीं प्रत्याशी भुवनेश्वरी देशमुख ने आरोप लगाया था कि अरुण गौतम ने नामांकन के दौरान अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की जानकारी नहीं दी। विशेष रूप से हत्या के प्रयास से जुड़ा मामला चुनावी हलफनामे में उल्लेखित नहीं था।

शुरुआत में रिटर्निंग ऑफिसर ने इस आपत्ति को खारिज कर दिया था, लेकिन बाद में मामला हाईकोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद एसडीएम कोर्ट में दोबारा सुनवाई हुई। जांच के दौरान यह सामने आया कि अरुण गौतम के खिलाफ पहले से गंभीर आपराधिक प्रकरण लंबित था, जिसे उन्होंने चुनावी दस्तावेजों में छिपाया था।

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि मतदाताओं से उम्मीदवार की आपराधिक जानकारी छिपाना चुनाव नियमों का उल्लंघन है। इसी आधार पर उनका चुनाव अमान्य घोषित किया गया। हालांकि कोर्ट ने दूसरे स्थान पर रहीं प्रत्याशी को विजयी घोषित करने से इनकार कर दिया।

अदालत ने माना कि दोनों उम्मीदवारों के बीच मतों का अंतर काफी ज्यादा था। अरुण गौतम को 869 वोट मिले थे, जबकि भुवनेश्वरी देशमुख को 741 वोट प्राप्त हुए थे। ऐसे में सीधे दूसरे उम्मीदवार को विजेता घोषित करना न्यायसंगत नहीं माना गया।

अब दुर्ग जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को राज्य निर्वाचन आयोग को रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए हैं ताकि समोदा गांव में नए सिरे से चुनाव प्रक्रिया शुरू की जा सके।

यह मामला अब केवल पंचायत चुनाव तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता, चुनावी घोषणा पत्रों की विश्वसनीयता और स्थानीय राजनीति के टकराव का बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है।

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