रायपुर (छत्तीसगढ़) — छत्तीसगढ़ सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपनी नई आबकारी नीति को मंजूरी दी है, जिसमें एक बड़ा बदलाव किया गया है — अब शराब को कांच की बोतलों की बजाय प्लास्टिक बोतलों में बेचा जाएगा।
राज्य कैबिनेट की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि अब सरकारी शराब दुकानों पर बिकने वाली शराब प्लास्टिक की बोतलों में पैक और सप्लाई की जाएगी। इस बदलाव का उद्देश्य सरकार के अधिकारियों के अनुसार यह है कि कांच की बोतलें बार-बार टूटने के कारण आर्थिक नुकसान और सुरक्षा जोखिम पैदा करती हैं, जबकि प्लास्टिक बोतलें हल्की, कम टूटने वाली और हैंडलिंग में आसान हैं।
सरकार ने यह भी कहा है कि इससे स्टोरेज और ट्रांसपोर्टेशन में आसान व्यवस्था होगी तथा लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आएगी।
हालांकि इस फैसले से पर्यावरणीय चिंताएँ भी बढ़ गई हैं। पर्यावरणविदों का कहना है कि प्लास्टिक के उपयोग में वृद्धि से पहले से ही गंभीर कचरा और प्रदूषण की समस्या और भी बढ़ सकती है, क्योंकि प्लास्टिक के बोतलों का पुनर्चक्रण आसान नहीं होता और यह लंबे समय तक पर्यावरण में बना रहता है।
पर्यावरण विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि प्लास्टिक बोतलों के उपयोग पर कड़े नियम और रीसाइक्लिंग सिस्टम की व्यवस्था पहले सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि इसके दुष्प्रभाव को कम किया जा सके।
सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था से पहले कांच की बोतलों के टूटने से होने वाले आर्थिक नुकसान और सुरक्षा जोखिम को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। साथ ही अधिकारियों ने कहा है कि पर्यावरण को लेकर चिंताओं का ध्यान रखा जाएगा और आवश्यक पर्यावरण प्रबंधन योजनाएं बनाई जाएंगी।
छत्तीसगढ़ की नई आबकारी नीति में शराब की पैकेजिंग में बड़े बदलाव के साथ यह फैसला लिया गया है कि शराब प्लास्टिक बोतलों में बेची जाएगी। इस फैसले का उद्देश्य लागत और नुकसान को कम करना है, लेकिन इससे प्लास्टिक प्रदूषण और पर्यावरणीय दुष्प्रभाव को लेकर गंभीर चिंता भी उभर रही है।
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