छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पतालों में अब सभी जांच फ्री, साय सरकार का बड़ा स्वास्थ्य फैसला

छत्तीसगढ़ सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए सरकारी अस्पतालों में ब्लड टेस्ट, सोनोग्राफी, एक्स-रे समेत सभी जांच पूरी तरह निशुल्क करने की घोषणा की है। यह सुविधा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से लेकर जिला और मेडिकल कॉलेज अस्पतालों तक लागू होगी।

Jan 22, 2026 - 14:56
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छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पतालों में अब सभी जांच फ्री, साय सरकार का बड़ा स्वास्थ्य फैसला
CG Govt Hospitals: ब्लड टेस्ट, सोनोग्राफी सहित सभी जांच होंगी निशुल्क, PHC से लेकर बड़े अस्पतालों तक लागू होगी व्यवस्था

रायपुर — छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने राज्य के नागरिकों को बड़ी राहत देते हुए स्वास्थ्य क्षेत्र में एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। सरकार ने घोषणा की है कि अब राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों में ब्लड टेस्ट, सोनोग्राफी, एक्स-रे, पैथोलॉजी और अन्य जरूरी मेडिकल जांच पूरी तरह निशुल्क की जाएंगी। यह सुविधा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज अस्पतालों तक लागू होगी।

इस फैसले का उद्देश्य आम जनता, खासकर गरीब, ग्रामीण और मध्यम वर्गीय परिवारों को महंगे मेडिकल खर्च से राहत देना है। अब मरीजों को जांच के लिए निजी लैब या डायग्नोस्टिक सेंटरों का रुख नहीं करना पड़ेगा।

 PHC से मेडिकल कॉलेज तक लागू होगी व्यवस्था

सरकार के अनुसार, यह योजना चरणबद्ध तरीके से पूरे राज्य में लागू की जाएगी।

  • प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC)

  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC)

  • जिला अस्पताल

  • मेडिकल कॉलेज अस्पताल

सभी स्तरों पर आवश्यक जांच सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी और मशीनों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी।

 गरीब और ग्रामीण मरीजों को सबसे ज्यादा लाभ

ग्रामीण इलाकों में रहने वाले मरीजों को अक्सर ब्लड टेस्ट और सोनोग्राफी जैसी जांचों के लिए शहर जाना पड़ता था, जिससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती थी। अब यह सुविधा नजदीकी सरकारी अस्पताल में ही उपलब्ध होने से इलाज समय पर और सस्ता हो सकेगा।

 स्वास्थ्य अधोसंरचना को भी किया जाएगा मजबूत

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जांचों को निशुल्क करने के साथ-साथ

  • अस्पतालों में नई मशीनें लगाई जाएंगी

  • तकनीकी स्टाफ और लैब टेक्नीशियन की भर्ती की जाएगी

  • दवाओं और जांच रिपोर्ट की समयबद्ध उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी

सरकार का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाएं किसी भी नागरिक का मूल अधिकार हैं और पैसों की कमी के कारण किसी को इलाज से वंचित नहीं किया जाएगा। यह फैसला जनकल्याण और स्वास्थ्य सुधार की दिशा में एक मजबूत कदम है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से लोगों का आउट-ऑफ-पॉकेट मेडिकल खर्च काफी कम होगा और सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर लोगों का भरोसा बढ़ेगा।

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